बुढ़ापे में भी दिमाग को रखना है जवां तो लिवर और आंतों पर चर्बी न चढ़ने दें : अध्ययन

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बुढ़ापे में भी दिमाग को रखना है जवां तो लिवर और आंतों पर चर्बी न चढ़ने दें : अध्ययन

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  • Publish Date - May 6, 2026 / 07:46 PM IST,
    Updated On - May 6, 2026 / 07:46 PM IST

नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) उम्र के आधे पड़ाव पर अगर यकृत (लिवर) और आंत जैसे आंतरिक अंगों में चर्बी को जमने से रोक लिया जाए तो बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क में होने वाली सिकुड़न को सीमित किया जा सकता है और संज्ञानात्मक प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है।

यह दावा एमआरआई स्कैन के आधार पर किये गए हालिया अध्ययन में किया गया है।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक मध्य आयु के उत्तरार्ध में 533 महिलाओं और पुरुषों के मस्तिष्क और पेट के मेगनेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन का विश्लेषण किया गया, जिन पर 16 वर्षों तक नजर रखी गई। इस अवधि के दौरान, प्रतिभागियों के संज्ञानात्मक मूल्यांकन के साथ-साथ आंतरिक वसा और मस्तिष्क संरचनाओं के बार-बार एमआरआई की मदद से आकलन किया गया।

‘ नेचर कम्युनिकेशंस’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधानपत्र के निष्कर्षों के मुताबिक पेट की चर्बी और मस्तिष्क की उम्र बढ़ने के बीच का संबंध मुख्य रूप से ग्लूकोज नियंत्रण और इंसुलिन संवेदनशीलता से परिलक्षित होता है।

इजराइल के बीर-शेवा स्थित बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव और अमेरिका के हार्वर्ड टी. एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ सहित अन्य संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन एमआरआई आधारित माप के जरिये आतंरिक अंगों में वसा के जमा होने और उससे मस्तिष्क की उम्र बढ़ने और संज्ञानात्मक क्षमता के दीर्घकालिक असर के संबंधों को लेकर किया जाने वाला पहला अध्ययन है।

बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव की प्रमुख अनुसंधानकर्ता आइरिस शाई ने कहा, ‘‘निष्कर्ष इंगित करता है कि ग्लूकोज नियंत्रण और पेट की आंतरिक चर्बी को कम करना मध्य आयु में मापने योग्य, परिवर्तनीय और हासिल करने योग्य लक्ष्य हैं। इनमें मस्तिष्क के क्षरण को धीमा करने और संज्ञानात्मक गिरावट के जोखिम को कम करने की क्षमता है।’’

उन्होंने बताया कि अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों के एक उपसमूह का पांच साल तक मस्तिष्क एमआरआई स्कैन कर प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। उन्होंने बताया कि इससे खुलासा हुआ कि समय के साथ आंतरिक अंगों में वसा के लगातार बढ़े हुए स्तर मस्तिष्क के आयतन में तेजी से कमी आने से जुड़े थे, विशेष रूप से हिप्पोकैम्पस (मस्तिष्क का स्मृति केंद्र) में।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि सतही या गहरी, दोनों प्रकार की त्वचा के नीचे जमा वसा और न ही बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) का मस्तिष्क से संबंध पाया गया बल्कि मस्तिष्क की उम्र का सीधा जुड़ाव आतंरिक अंगों में जमा वसा के साथ है।

अध्ययन के मुताबिक वजन घटाने के बजाय लगातार आंतरिक वसा के स्तर को सीमित रखने से, मुख्य रूप से बेहतर ग्लाइसेमिक नियंत्रण के माध्यम से, वर्षों बाद बेहतर संज्ञानात्मक क्षमता और मस्तिष्क क्षरण में कमी लाई जा सकती है।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक 18 महीने के आहार संबंधी हस्तक्षेप के दौरान आंतरिक चर्बी में कमी से पांच और 10 साल बाद मस्तिष्क की संरचनाओं के बेहतर संरक्षण का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में, वजन घटाने के बजाय आंतरिक अंगों पर जमा होने वाली चर्बी में कमी ही दीर्घकालिक मस्तिष्क परिणामों का पूर्वानुमान लगाने वाला कारक है।

भाषा धीरज नरेश

नरेश