संसद मार्च के बाद फिर जंतर-मंतर लौटे प्रदर्शनकारी, आंदोलन जारी रखने का जताया संकल्प

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संसद मार्च के बाद फिर जंतर-मंतर लौटे प्रदर्शनकारी, आंदोलन जारी रखने का जताया संकल्प

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 05:30 PM IST

(फोटो सहित)

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की ओर से आयोजित संसद मार्च के एक दिन बाद मंगलवार को सैकड़ों छात्र और समर्थक फिर जंतर-मंतर पहुंचे। उनका कहना है कि पुलिस के बल प्रयोग की कार्रवाई ने आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया है तथा वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

दोपहर में जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल छात्रों, उनके अभिभावकों और समर्थकों से खचाखच भर गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं को लेकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।

कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सोमवार को सुरक्षाकर्मियों के साथ आमना सामना होने से वे डरे नहीं हैं बल्कि इस घटना ने आंदोलन में और लोगों को जोड़ा है।

सोमवार के संसद मार्च में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा साक्षी चंदा ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से आंदोलन और तेज हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘कल हमने जिस तरह की पुलिस की बर्बरता देखी, उससे हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है। हम दोबारा इसलिए लौटे हैं क्योंकि यह आंदोलन कई लोगों के त्याग और संघर्ष से खड़ा हुआ है। हम उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। जब तक हमारी आवाज नहीं सुनी जाएगी, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।’’

साक्षी चंदा के साथ खड़ी उनकी मां ने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज यहां इसलिए आई हूं क्योंकि यह हमारे बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर हम अभी उनके साथ नहीं खड़े होंगे, तो कौन होगा? वे अपनी शिक्षा और करियर से जुड़े सवाल उठा रहे हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।’’

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन अब कथित पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यापक मुहिम बन गया है। इस दौरान जंतर-मंतर पर ‘‘धर्मेंद्र प्रधान, इस्तीफा दो’’ और ‘‘एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे’’ के नारे लगातार गूंजते रहे।

स्नातकोत्तर छात्रा रितिका शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर है।

उन्होंने कहा, ‘‘हममें से कई लोगों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाए हैं। हम यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि इसलिए आए हैं क्योंकि छात्रों को पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए।’’

इस प्रदर्शन में दिल्ली के बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

गाजियाबाद से आए आदित्य सिंह ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई प्रदर्शनकारियों का हौसला तोड़ने में नाकाम रही। उन्होंने कहा, ‘‘कल हमने बैरिकेडिंग, हिरासत और बल प्रयोग देखा, लेकिन इसका आज के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा। बल्कि इसके उलट, और अधिक लोग आंदोलन से जुड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इतिहास गवाह है कि सत्ता में बैठे लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि जब नागरिक अपने सवालों के साथ सड़कों पर उतरते हैं, तो उनकी आवाज को दबाना बहुत मुश्किल होता है।’’

सोमवार को कॉजपा के संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि संसद मार्ग के पास कई स्तर की बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका गया और इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े।

प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को भी दोहराया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा।

भाषा आशीष नरेश

नरेश