Vande Bharat: देश की राजधानी में मौत की ‘इमारत’! हॉस्टल की बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत, आखिर कब तक हादसों के बाद सब कुछ ठीक करने का दावा करता रहेगा सिस्टम?

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देश की राजधानी में मौत की 'इमारत'! हॉस्टल की बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत, Building of Death in Nation's capital Delhi

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 12:08 AM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 12:08 AM IST

Vande Bharat IBC24 News || Image- IBC24 News File

नई दिल्लीः Vande Bharat: देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल की बिल्डिंग गिरने के हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खुदाई के दौरान पिलर खिसकने से पूरी इमारत ढह गई। हादसे में 7 लोगों की मौत और 12 लोगों के रेस्क्यू की सूचना है। सवाल है कि कब तब ऐसे हादसों में लोग जान गंवाते रहेंगे और सिस्टम हादसों के बाद सब कुछ ठीक करने का दावा करता रहेगा?

Vande Bharat: दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक हॉस्टल की बिल्डिंग रविवार दोपहर गिर गई। ये हादसा तब हुआ जब इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर में खुदाई का काम चल रहा था और स्टूडेंट्स हॉस्टल के कमरों में मौजूद थे। अब तक की सूचना में 7 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक ये साफ नहीं है कि कितने लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं। 12 लोगों को मलबे के नीचे से निकाला गया है। अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है। इनमें 5 की हालत गंभीर है। दिल्ली हॉस्टल के हॉस्टल के मालिक हरिराम बंसल को पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से हिरासत में लिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में पिछले 7 दिनों से तोड़फोड़ का काम चल रहा था। बेसमेंट पहले से कमजोर था और उसमें पानी भी भरा हुआ था। खुदाई के दौरान एक पिलर खिसक गया, जिससे पूरी इमारत ढह गई। हादसे के समय वहां काम कर रहे मजदूर भी मलबे में दब गए।

2022 से 2025 तक यानी 3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने के 1133 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में 98 लोगों की मौत हुई है। सत्य निकेतन की ये बिल्डिंग करीब 40 साल पुरानी थी। दिल्ली नगर निगम (MCD) के रिकॉर्ड में इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। हादसे के बाद कुछ लोगों को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सवाल ये है कि कांक्रीट और हाईरेज बिल्डिंग में तब्दील होती दिल्ली में क्या इमारतों के निर्माण में निगरानी व्यवस्था को और दुरुस्त करने की जरूरत नहीं है।