सागरः Sagar Madhya Pradesh मध्य प्रदेश के सागर में ज़हरीली शराब से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। सौ से ज्यादा लोग अब भी ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पाटन, नौराज, डिलोना, बमूरा, हिनौती और गूगराखुर्द ये गांव हॉट स्पॉट हैं, जहां सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। इस घटना ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सिस्टम के ज़िम्मेदारों के पास यूं भी हादसों के बाद कहने को बहुत कुछ होता नहीं.. वही रटी-रटाई तीन चार लाईनें। ऐसे हर हादसों के बाद बोली जाती हैं।
Sagar Madhya Pradesh छिंदवाड़ा कप सीरप, इंदौर दूषित पानी और बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के बाद जहरीली शराब का ये मामला विपक्ष को तश्तरी में परोस कर मिला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सरकार पर सवाल तो खड़े कर ही रहे हैं लेकिन अपनी सियासी सुविधा से उसे एंगल भी दे रहे हैं कि हर जगह मरने वाले हिंदू थे यानी भाजपा के राज में हिंदू खतरे में हैं।
विपक्ष के आरोप और सरकार की कैफियत अपनी जगह है, लेकिन सवाल ये है कि क्या अपने फायदे के लिए लोगों की जान ले लेना हत्या के बराबर अपराध नहीं है? तय दुकानों को छोड़कर गांव-गांव शराब बिकना क्या बिना प्रशासन की शह के संभव है? मुरैना में अवैध शराब से मौतों के बाद हटाए गए एसपी अभी सागर के एसपी हैं, ये क्या किसी संयोग की तरफ इशारा नहीं करता? सबसे बड़ा सवाल ये कि मुआवजे का मरहम अपनों को खो चुके लोगों को कितनी तसल्ली दे पाएगा?