नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार समेत अन्य हितधारकों को निर्देश दिया कि वे दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में सुधार के लिए केंद्रीय प्रदूषण निगरानी संस्था द्वारा अनुशंसित दीर्घकालिक उपायों पर अपनी-अपनी कार्य योजना चार सप्ताह के भीतर पेश करें।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा प्रस्तुत वस्तु स्थिति रिपोर्ट का संज्ञान लिया।
पीठ ने कहा कि सीएक्यूएम ने 15 दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश की है और उन संबंधित एजेंसियों की भी पहचान की है, जो इन दीर्घकालिक उपायों को लागू करने में सक्षम हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए उपायों के अलावा भी कुछ अतिरिक्त दीर्घकालिक उपायों को अपनाने की आवश्यकता हो सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सीएक्यूएम द्वारा अनुशंसित इन दीर्घकालिक उपायों को बिना किसी देरी के लागू किया जाना आवश्यक है। इसलिए हम हितधारकों से इन उपायों को लागू करने के लिए अपनी-अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करने का आग्रह करते हैं।”
पीठ ने कहा कि यह न्यायालय इन उपायों के संबंध में किसी भी आपत्ति पर विचार करने के पक्ष में नहीं है।
सुनवाई शुरू होते ही भाटी ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि सीएक्यूएम ने विस्तृत दीर्घकालिक उपाय प्रस्तुत किए हैं, जिनमें उत्सर्जन के आधार पर दिल्ली-एनसीआर से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना, रेल परिवहन और मेट्रो का विस्तार करना, संशोधित इलेक्ट्रिक वाहन नीति आदि शामिल हैं।
इस मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि पहले की योजनाओं में भी इसी तरह के कदम सुझाए गए हैं और न्यायालय को प्रस्तावित सिफारिशों के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित करने की आवश्यकता है।
भाटी ने अदालत को बताया कि ऐसी एजेंसियों की पहचान कर ली गई है, जो उपायों के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क कोष की व्यवस्था कर सकती हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि वह सिफारिशों पर किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं करेगा। केंद्रीय प्रदूषण निगरानी संस्था को ‘अपने कर्तव्य में विफल’ बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने छह जनवरी को दिल्ली की सीमाओं पर यातायात जाम को कम करने के लिए टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने के मुद्दे पर दो महीने का स्थगन मांगने के लिए प्राधिकरण को फटकार लगाई थी।
भाषा
संतोष दिलीप
दिलीप