नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि एंटी-रेबीज टीका (एआरवी) और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (आरआईजी) के उत्पादन का वर्षवार समेकित आंकड़ा केंद्र स्तर पर नहीं रखा जाता, क्योंकि इसका निर्माण कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा किया जाता है।
प्रश्नकाल के दौरान उनसे पूछा गया था कि क्या देश में रेबीज के इलाज के लिए आरआईजी और एआरवी इंजेक्शनों का उत्पादन आवश्यकता से कम है, जबकि इनका निर्यात भी किया जा रहा है।
नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है।
उन्होंने बताया कि भारत में एआरवी के उत्पादन की क्षमता लगभग 8.17 करोड़ वायल और आरआईजी की 1.77 करोड़ वायल प्रतिवर्ष है।
उन्होंने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 3,45,270 किलोग्राम आरआईजी और एआरवी का निर्यात किया गया, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 2,61,261 किलोग्राम था।
नड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं के आधार पर स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत, राष्ट्रीय मुफ्त औषधि पहल के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आरआईजी और एआरवी की खरीद के लिए धन आवंटित किया जाता है।
मंत्री ने कहा कि आरआईजी और एआरवी की खरीद विकेंद्रीकृत है और राज्यों को समय-समय पर परामर्श जारी किए जाते हैं, ताकि इन दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
भाषा मनीषा माधव
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