केंद्र सरकार के 2019 के एकतरफा फैसलों से कश्मीर विवाद का समाधान नहीं हुआ: मीरवाइज उमर फारूक

केंद्र सरकार के 2019 के एकतरफा फैसलों से कश्मीर विवाद का समाधान नहीं हुआ: मीरवाइज उमर फारूक

  •  
  • Publish Date - January 2, 2026 / 08:23 PM IST,
    Updated On - January 2, 2026 / 08:23 PM IST

(फोटो के साथ)

श्रीनगर, दो जनवरी (भाषा) कश्मीर के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के संबंध में केंद्र के 2019 के ‘‘एकतरफा’’ फैसलों से क्षेत्र में संघर्ष का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष कभी भी भड़क सकता है।

फारूक ने कहा कि कश्मीर के लोगों और नयी दिल्ली के बीच ‘‘विश्वास की कमी’’ ‘‘कम होने के बजाय और बढ़ गई है’’।

शुक्रवार को नजरबंद किये गये मीरवाइज ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो के माध्यम से लोगों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि जैसे ही एक और साल शुरू हुआ है, ‘‘2025 की दर्दनाक यादें हमारे साथ बनी हुई हैं’’।

उन्होंने कहा, ‘‘यह त्रासदी और अनिश्चितता से भरा वर्ष था। पहलगाम के भयावह हमले ने हमें बुरी तरह झकझोर दिया। घाटी में सभी ने इसकी घोर निंदा की, जिससे लोगों में काफी चिंता फैल गई क्योंकि उन्हें निशाना बनाया गया और उनके घर ध्वस्त कर दिए गए। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच एक और संघर्ष छिड़ गया और इसने इस बात की स्पष्ट याद दिला दी कि इस क्षेत्र में शांति कितनी नाजुक बनी हुई है।’’

फारूक ने नवंबर में दिल्ली के लाल किले के निकट हुए विस्फोट का भी जिक्र किया।

फारूक ने कहा, ‘‘2019 में एकतरफा बदलाव किए जाने के बावजूद, वास्तविकता यह है कि कश्मीर संघर्ष क्षेत्र को एक अस्थिर स्थिति में बनाए हुए है जो कभी भी भड़क सकता है। यही कारण है कि युद्ध समाप्त नहीं होते, बल्कि स्थगित होते हैं, और बातचीत के लिए कोई तत्पर नहीं है।’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया था और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया।

उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के लिए ‘‘ज्यादा कुछ नहीं बदला है’’।

उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरियों और नयी दिल्ली के बीच विश्वास की कमी कम होने के बजाय और बढ़ गई है। जबरन चुप्पी को सहमति के रूप में पेश किया जा रहा है। घाव अभी भी हरे हैं, समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है और एक केंद्र शासित प्रदेश की चुनी हुई सरकार अपनी बेबसी का रोना रो रही है।’’

अपनी ‘अवामी एक्शन कमेटी’ (एएसी) पर प्रतिबंध का जिक्र करते हुए फारूक ने कहा कि एएसी एक सामाजिक-राजनीतिक संस्था है जो जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाती है और शांति, संवाद और समाधान की वकालत करती है।

फारूक ने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर में वार्ता से क्षेत्र की समस्याओं का समाधान हो सकेगा।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश