कूनो के चीतों का भटकना स्वाभाविक, पहले से इसका अनुमान था: भूपेंद्र यादव

Ads

कूनो के चीतों का भटकना स्वाभाविक, पहले से इसका अनुमान था: भूपेंद्र यादव

  •  
  • Publish Date - May 19, 2026 / 10:29 PM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 10:29 PM IST

(अलिंद चौहान)

नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से चीतों के राजस्थान की ओर जाने की हालिया घटनाओं पर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि उनका भटकना और नए क्षेत्रों की खोज करना स्वाभाविक है और इसकी पहले से ही संभावना जताई गई थी।

मंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा प्रकाशित “चीता लैंडस्केप इन इंडिया 2024” मानचित्र में पहले ही कूनो–गांधीसागर–रणथंभौर क्षेत्र को एक बड़े अंतर-राज्यीय चीता संरक्षण परिसर के हिस्से के रूप में चिह्नित किया गया था।

यादव ने कहा, ‘‘एनटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा तैयार किए गए मानचित्र के अनुसार, कूनो चीता क्षेत्र का दायरा लगभग 11,566 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें से लगभग 8,833 वर्ग किलोमीटर मध्यप्रदेश में और 2,733 वर्ग किलोमीटर राजस्थान में स्थित है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मानचित्र इन क्षेत्रों को जोड़ने वाले लगभग 6,800 वर्ग किलोमीटर के जुड़े हुए वन्य रहवास को भी चिह्नित करता है। इसलिए, राजस्थान में चीतों का प्रवेश व्यापक पारिस्थितिक परिदृश्य के भीतर ही आता है।’’

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भूभाग का वैज्ञानिक रूप से मानचित्रण किया जा चुका है, फिर भी चीतों के इन विस्तृत क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से बसने से पहले पर्याप्त जमीनी तैयारी की आवश्यकता है।

मंत्री के अनुसार, लंबी दूरी की आवाजाही के दौरान चीतों को मानव-वन्यजीव संघर्ष, सड़क और रेल दुर्घटनाओं तथा क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया ढांचे की कमी तथा रहवास की कमी जैसी समस्याओं के कारण जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

यादव ने कहा, ‘‘इनसे निपटने के लिए, अधिकारियों को इन विस्तृत भूभागों में तैनात टीम को प्रशिक्षित करने, निगरानी और बचाव व्यवस्था में सुधार करने, प्रभावी हरित गलियारे स्थापित करने और संपर्क उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता है।’’

भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को ‘प्रोजेक्ट चीता’ की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस परियोजना के तहत 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था।

इसके बाद बोत्सवाना से नौ चीते लाकर राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए। वर्तमान में चीतों की कुल संख्या 53 है, जिनमें से 33 भारत में जन्मे हैं।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान चीतों को बसाने का प्रमुख केंद्र है, वहीं मध्यप्रदेश का गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य भी एक अतिरिक्त आवास स्थल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि चीतों के संरक्षण और विस्तार के प्रयासों को और मजबूती मिल सके।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश

शीर्ष 5 समाचार