चिदंबरम ने वंदे मातरम् के प्रति ‘अचानक उमड़े प्रेम’ को लेकर भाजपा पर निशाना साधा

Ads

चिदंबरम ने वंदे मातरम् के प्रति ‘अचानक उमड़े प्रेम’ को लेकर भाजपा पर निशाना साधा

  •  
  • Publish Date - August 29, 2026 / 07:59 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 07:59 PM IST

मदुरै, 29 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने वंदे मातरम् के प्रति भाजपा के ‘‘अचानक उमड़े प्रेम’’ को लेकर शनिवार को उसपर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को इसके इतिहास की जानकारी नहीं है, उन्होंने संसद में इससे संबंधित एक विधेयक पारित कर दिया।

चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से पूछा कि क्या स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्यों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया था।

राज्यसभा सदस्य चिदंबरम ने कहा कि वंदे मातरम् से जुड़ा विवाद अनावश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जानबूझकर यह विवाद पैदा किया।

संसद के हाल में संपन्न हुए मानसून सत्र और उसमें 12 विधेयकों के पारित होने के संबंध में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनमें से एक विधेयक ‘‘वंदे मातरम् राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’’ से संबंधित था।

इस संदर्भ में, चिदंबरम ने आरोप लगाया कि 1947 से पहले न तो भाजपा और न ही हिंदू महासभा एवं आरएसएस वंदे मातरम् के बारे में जानते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारतीय जनता पार्टी से पूछता हूं कि स्वतंत्रता के 100 वर्षों के संघर्ष के दौरान किसी एक भी जगह का उदाहरण बताइए, जहां हिंदू महासभा, जनसंघ या आरएसएस ने कभी ‘वंदे मातरम्’ गाया हो। अगर उन्होंने इसे गाया होता, तो क्या इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता? क्या इसके बारे में कोई खबर नहीं होती?’’

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता तो यह खबर अखबारों में छपी होती और इसका रिकॉर्ड मौजूद होता।

उन्होंने दावा किया कि कहीं भी, किसी भी समय, किसी भी दिन हिंदू महासभा, आरएसएस या जनसंघ ने कभी ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाया। उन्होंने यह भी दावा किया वास्तव में, स्वतंत्रता के बाद कई वर्षों तक उन्होंने नागपुर में तिरंगा झंडा तक नहीं फहराया।

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि पिछले 10 से 12 वर्षों से ही वे स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे हैं और इससे पहले, वे केवल भगवा झंडा फहराते थे।

उन्होंने पूछा, ‘‘तो फिर वंदे मातरम् के प्रति अचानक इतना प्रेम क्यों उमड़ पड़ा? वंदे मातरम् का एक इतिहास है। जो लोग उस इतिहास को नहीं जानते, वे यह कानून पारित कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि छह अंतरों में से केवल पहले दो अंतरे ही राष्ट्र की प्रशंसा में हैं। उन्होंने कहा कि तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे अंतरे में विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं की स्तुति की गई है।

चिदंबरम ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह गलत है। लेकिन स्वतंत्रता-पूर्व भारत में इस बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया था कि सभी छह अंतरे गाए जाएं या केवल पहले दो अंतरे।’’

चिदंबरम ने कांग्रेस कार्य समिति में पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में हुई विस्तृत चर्चा का उल्लेख किया और बताया कि बाद में पार्टी ने सर्वसम्मति से केवल दो अंतरे गाने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा नेहरू को लिखे गए पत्र के बाद लिया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पहले दो अंतरे गाना पर्याप्त है।

उन्होंने कहा, ‘‘उस बैठक में कांग्रेस की केंद्रीय कार्य समिति में विस्तृत चर्चा हुई। इस मौके पर महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल मौजूद थे… मौलाना अबुल कलाम आजाद भी वहां थे। सभी लोग मौजूद थे। वे सर्वसम्मति से इस निर्णय पर पहुंचे कि दो अंतरे गाना ही पर्याप्त है।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘कांग्रेस के सदस्यों को वे दो अंतरे पता हैं। दूसरी पार्टियों को तो ये दो अंतरे भी नहीं पता हैं। खासतौर पर, भाजपा को ये दो अंतरे भी नहीं पता हैं।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की बैठकों में भी केवल मल्लिकार्जुन खरगे जैसे वरिष्ठ नेता ही दोनों अंतरे पूरी तरह गा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के छात्र कांग्रेस और युवा कांग्रेस के सदस्य इन्हें याद करने की कोशिश कर रहे हैं।

चिदंबरम ने कहा, ‘‘यह सब एक अनावश्यक विवाद था। उन्होंने जानबूझकर इस विवाद को खड़ा किया और इसके लिए एक विधेयक पारित कर दिया।’’

उन्होंने दावा किया कि सरकार ने यह विधेयक दोपहर 1:30 बजे पेश किया और 1:35 बजे तक इसे पारित कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ये सभी अनावश्यक विवाद हैं और ऐसे मुद्दे हैं जिनका वास्तव में कोई महत्व नहीं है।’’

भाषा

देवेंद्र सुरेश

सुरेश