औचक निरीक्षण पर अस्पताल पहुंचीं मुख्यमंत्री, दवाइयों की कमी और गंदगी पर अधिकारियों को लगाई फटकार

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औचक निरीक्षण पर अस्पताल पहुंचीं मुख्यमंत्री, दवाइयों की कमी और गंदगी पर अधिकारियों को लगाई फटकार

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  • Publish Date - April 23, 2026 / 07:50 PM IST,
    Updated On - April 23, 2026 / 07:50 PM IST

नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को यहां सिविल लाइंस स्थित अरुणा आसफ अली सरकारी अस्पताल का अचानक निरीक्षण किया और “दवाओं की कमी और गंदगी” के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने एक बयान में यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि वे गर्मी के मौसम के अनुरूप दवाएं, पीने का पानी, स्वच्छता और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करें।

बयान में कहा गया है कि अचानक किए गए इस दौरे से दवाइयों की कमी और खराब स्वच्छता का खुलासा हुआ, जिसके लिए गुप्ता ने अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों को फटकार लगाई।

उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों को उसी दिन दवाएं उपलब्ध कराईं जाएं जिस दिन डॉक्टर उनकी जांच करते हैं।

गुप्ता ने ओपीडी, रोगी वार्ड, दवा वितरण काउंटर, स्वच्छता प्रणाली, जल आपूर्ति, डिजिटल सेवाओं और अन्य प्रमुख विभागों का निरीक्षण किया।

इसमें कहा गया है कि मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत करके, उन्होंने अस्पताल के कामकाज पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया प्राप्त की और शिकायतें मिलने पर तत्काल सुधार करने का आदेश दिया।

बयान के मुताबिक, दौरे के दौरान, कई बुजुर्ग मरीजों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे सुबह आठ बजे से कतारों में खड़े हैं और डॉक्टरों ने उन्हें नहीं देखा।

गुप्ता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की और स्थिति को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता में कमी, ओपीडी में मरीजों की भीड़, ऑनलाइन समय देने और टोकन व्यवस्था में खामियां पाए जाने को लेकर भी अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रणालियों को इस तरह एकीकृत किया जाए कि मरीजों का प्रतीक्षा समय न्यूनतम हो।

बयान के मुताबिक, संवाद के दौरान कई मरीजों ने अस्पताल में दवाओं की अनुपलब्धता और बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी की शिकायत की।

इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने मौके पर ही ‘स्टॉक रजिस्टर’ की जांच के निर्देश दिए और कहा कि दवाइयों और टीकों की उपलब्धता में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए।

बयान में कहा गया है कि मरीजों और उनके तीमारदारों ने अस्पताल में स्वच्छता, जल आपूर्ति और अन्य सुविधाओं के संबंध में भी शिकायतें कीं।

गुप्ता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “हमारा संकल्प है कि दिल्ली का हर नागरिक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था का अनुभव करे जहां उसे समय पर इलाज मिले, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों, साफ-सुथरा माहौल हो और मरीजों के साथ सम्मानजनक तरीके से व्यवहार किया जाए।”

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार प्रत्येक परिवार को विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और प्रत्येक अस्पताल को सेवा, संवेदनशीलता और विश्वास का केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।

भाषा

नोमान प्रशांत

प्रशांत