अनुकंपा नियुक्ति की व्याख्या निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से होनी चाहिए: उच्चतम न्यायालय

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अनुकंपा नियुक्ति की व्याख्या निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से होनी चाहिए: उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - August 12, 2026 / 08:30 PM IST,
    Updated On - August 12, 2026 / 08:30 PM IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय है, जिसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति संबंधी योजना की व्याख्या निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए, ताकि इसका उद्देश्य पूरा हो, न कि विफल हो।

पीठ ने कहा, ‘‘यह अच्छी तरह स्थापित है कि अनुकंपा नियुक्ति का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता। लेकिन साथ ही यह एक कल्याणकारी उपाय है, जिसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसलिए योजना की व्याख्या निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए, ताकि इसका उद्देश्य पूरा हो, न कि विफल हो।’’

उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी उस व्यक्ति की याचिका स्वीकार करते हुए की, जिसके पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की उसकी मांग इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि जब उसके दावे पर विचार किया गया, तब वह राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते -6 की धारा 9.3.4 के तहत निर्धारित 35 वर्ष की अधिकतम आयु पार कर चुका था।

उस व्यक्ति के पिता ‘वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ में कार्यरत थे। उन्होंने करीब 36 वर्षों तक ‘डोजर ऑपरेटर’ के रूप में काम किया था और 17 दिसंबर 2020 को सेवा में रहते हुए उनकी मृत्यु हो गई थी। कर्मचारी की मृत्यु के दिन उनके बेटे की उम्र 34 वर्ष, 10 महीने और 12 दिन थी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि बेटे को केवल इसलिए अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि अधिकारियों ने उसके दावे पर कार्रवाई करने और फैसला लेने में अनुचित रूप से लंबा समय लगा दिया।

न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों को उनके ही स्तर पर आवेदन के निपटारे में हुई देरी का फायदा उठाकर ऐसे आश्रित व्यक्ति के दावे को खारिज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पीठ ने कहा, ‘‘प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपीलकर्ता संख्या-2 (बेटे) के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर दोबारा विचार करें और उम्र के लिहाज से उसे पात्र मानें। इसके बाद लागू योजना के तहत केवल अन्य शर्तों की जांच की जाए। यह प्रक्रिया इस फैसले की प्रति प्राप्त होने की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यदि अपीलकर्ता संख्या-2 अन्य सभी मामलों में पात्र पाया जाता है, तो इसके बाद चार सप्ताह के भीतर उसे नियुक्ति पत्र दिया जाए।’’

भाषा गोला पारुल

पारुल