Vande Bharat : Image Source : FILE
नई दिल्ली : Vande Bharat : संसद में गतिरोध सिर्फ 25 जुलाई के पुलिस लाठीचार्ज को लेकर नहीं है बल्कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी भी विपक्ष के लिए एक बड़ा मुद्दा है। विपक्ष इस पर भी सरकार से जवाब चाहता है। यही वजह है कि मानसून सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक लगातार इस मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन और नारेबाजी जारी है।
समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है। अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव तक इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है। Ram Mandir latest updates राम मंदिर चंदा चोरी के चलते ही इसका प्रबंधन एक CEO के हाथों में देने की कवायद भी चल रही है। हालांकि आयोध्या के साधु संत ही CEO पद का विरोध करने लगे हैं।उन्हें आशंका है कि कहीं ये पिछले दरवाजे से राम मंदिर को सरकारी नियंत्रण में लाने की कोशिश तो नहीं आखिर क्या है।
अयोध्या में राम मंदिर के CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। गुरूवार को लगातार दूसरे दिन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया उनके प्रशासनिक अनुभव, धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन, भीड़ प्रबंधन और श्रीराम जन्मभूमि के विजन को परख गया। इंटरव्यू पैनल ने पूछा क्या आप भगवान राम में आस्था रखते हैं ? क्या आप जनेऊ पहनते हैं? क्या आप शिखा/चोटी रखते हैं?धर्म और सामाजिक गतिविधियों में आपकी भागीदारी कितनी है?…
लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट की CEO की नियुक्ति की ये कवायद साधु-संत समाज के एक बड़े तबके को रास नहीं आ रही। उन्होंने इसे लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। सांधु-संतों ने CEO की नियुक्ति पर आपत्ति जताई तो इसी बहाने सपा को बीजेपी को घेरने का मौका मिल गया जिस पर बीजेपी भी सपा पर हमलावर हुई।
राम मंदिर के CEO पद के लिए 5 हजार 300 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था लेकिन सिर्फ 18 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इंटरव्यू के बाद 3 नाम फाइनल किए जाएंगे फिर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इनका इंटरव्यू लेगा और आखिर में एक नाम सामने आएगा। साधु-संत समाज की आपत्ति के बीच अब ये देखना दिलचस्प होगा कि CEO का पद चंदा चोरी से राम मंदिर की धूमिल हुई प्रतिष्ठा बहाल कर पाता है या किसी नए विवाद को जन्म देता है।
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