राष्ट्रगीत से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस का आरोप: प्रधानमंत्री सबसे बड़े ‘डिस्टॉरियन’

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राष्ट्रगीत से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस का आरोप: प्रधानमंत्री सबसे बड़े 'डिस्टॉरियन'

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 11:57 AM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 11:57 AM IST

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर शुक्रवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी और राष्ट्रगीत से जुड़े हालिया विवाद को लेकर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े ‘डिस्टॉरियन’ (इतिहास को विकृत करने वाले) हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य नेताओं ने नेताजी को श्रद्धांजलि दी।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नेताजी को याद करते हुए संसद के बीते शीतकालीन सत्र में राष्ट्रगीत पर हुई चर्चा का उल्लेख किया और प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘पिछले महीने संसद में राष्ट्रीय गीत पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों को काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी और उनकी पोल खुल गई थी, साथ ही राष्ट्रगान के इतिहास को भी विकृत करने का प्रयास किया गया था – जिससे इस प्रक्रिया में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का अपमान हुआ।’

उन्होंने कहा, ‘आज 23 जनवरी 2026 को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, जिन्होंने 1937 में वंदे मातरम् के बाद के अंश को लेकर हुए विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसे प्रधानमंत्री ने जानबूझकर दबा दिया था। इसके अलावा, नेताजी के पौत्र और प्रसिद्ध इतिहासकार सुगत बोस ने लिखा है कि नेताजी ने 2 नवंबर, 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर का उद्घाटन किया था और जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में चुना था।’

रमेश के मुताबिक, 2 अक्टूबर, 1943 को सिंगापुर में नेताजी ने आजाद हिंद सरकार के नारे के रूप में जय हिंद को चुना, एक ऐसा नारा जिसे प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी ने कभी नहीं लगाया।

रमेश ने कहा, ‘निश्चित रूप से वह नेताजी ही थे, जिन्होंने 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से एक रेडियो प्रसारण में सबसे पहले महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा था – जिनकी स्मृति और विरासत को प्रधानमंत्री व्यवस्थित रूप से ध्वस्त कर रहे हैं, जिसका नवीनतम उदाहरण मनरेगा को निरस्त करना है।’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे बड़े डिस्टॉरियन हैं।’’

भाषा हक खारी वैभव

वैभव