अदालत ने कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले से संबंधित अर्जी वापस लेने की अनुमति दी

अदालत ने कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले से संबंधित अर्जी वापस लेने की अनुमति दी

अदालत ने कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले से संबंधित अर्जी वापस लेने की अनुमति दी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:09 pm IST
Published Date: August 24, 2022 4:29 pm IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण के अनुरोध वाली अपनी अर्जी वापस लेने की अनुमति दे दी।

कार्ति की तरफ से पेश अधिवक्ता अर्शदीप सिंह ने कहा कि ईडी ने इस मामले में निचली अदालत के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जहां जांच एजेंसी द्वारा नियमित जमानत के लिए उनकी याचिका को इस अदालत के समक्ष दंडात्मक कदम से संरक्षण वाली अर्जी के लंबित रहने को आधार बनाते हुए चुनौती दी गई है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति ने अपने आवेदन में कहा कि वह अर्जी वापस लेना चाहते हैं ताकि निचली अदालत के समक्ष लंबित उनकी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई हो पाए। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ने केवल पूर्व की अर्जी को वापस लेने के लिए अनुमति मांगी है, जो इस अदालत के समक्ष लंबित है। याचिकाकर्ता की ओर से एक खास अर्जी के संदर्भ में अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता को पूर्व की अर्जी वापस लेने की अनुमति दी जाती है।’’

कार्ति चिदंबरम द्वारा 2018 में दायर अर्जी, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के कुछ प्रावधानों और उनके खिलाफ ईडी मामले को चुनौती देने वाली याचिका का हिस्सा थी। अर्जी में अदालत से अंतरिम आदेश का अनुरोध करते हुए कहा गया था कि याचिका लंबित रहने तक ईडी को उनके खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई से रोका जाए। उच्च न्यायालय ने नौ मार्च, 2018 को मामले में कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी।

ईडी का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 15 मई, 2017 को दर्ज एक मामले पर आधारित है, जिसमें 2007 में वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान आईएनएक्स मीडिया समूह को 305 करोड़ रुपये के विदेशी धन प्राप्त करने के लिए दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी में कथित अनियमितताएं हुईं। इसके आधार पर ईडी द्वारा धन शोधन का मामला दर्ज किया गया था।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा


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