जंतर-मंतर आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के लिए सुझावों की भरमार
जंतर-मंतर आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के लिए सुझावों की भरमार
( श्रुति भारद्वाज )
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) जंतर-मंतर पर जारी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के लिए अनेक तरह के सुझाव साझा किए जा रहे हैं। इनमें इंटरनेट बंद होने की स्थिति से निपटने से लेकर आंसू गैस के प्रभाव को कम करने तक के सुझाव शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं और पुलिस के साथ समय-समय पर होने वाले टकराव के बीच ये सुझाव तेजी से साझा किए जा रहे हैं। इनमें ऑफलाइन नक्शे डाउनलोड करने और आपात स्थिति में संपर्क बनाए रखने जैसे उपाय भी शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर एक उपयोगकर्ता ने प्रदर्शन में शामिल होने वालों को पहले से ऑफलाइन नक्शे डाउनलोड करने की सलाह दी। इस उपयोगकर्ता ने आंदोलन के दौरान कई बार इंटरनेट सेवाएं बंद होने का अनुभव होने का दावा किया।
उसने ‘ब्लूटूथ’ आधारित, ऐसे संदेश भेजने वाले ऐप रखने की भी सलाह दी, जो मोबाइल डेटा या ‘वाई-फाई’ के बिना भी काम करते हैं। साथ ही, उसने ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित भाषा मॉडल अपने उपकरण में स्थापित करने की बात कही, जो इंटरनेट के बजाय सीधे उपकरण पर काम करते हैं, ताकि इंटरनेट बंद होने पर भी उनका उपयोग किया जा सके।
उसने ‘लोरा’ (लॉन्ग रेंज) आधारित संचार उपकरण साथ रखने तथा आपात स्थिति के लिए प्रदर्शन स्थल के आसपास रहने वाले कम से कम पांच लोगों के संपर्क नंबर सुरक्षित रखने की भी सलाह दी।
इसी तरह, सोशल मीडिया पर आंसू गैस के प्रभाव से राहत पाने के उपाय भी व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं।
एक महिला उपयोगकर्ता ने पानी और अम्लनाशक (एंटएसिड) दवा जैसे मालोक्स या डाइजीन को बराबर मात्रा में मिलाकर साथ रखने की सलाह दी। उसका दावा था कि आंसू गैस के संपर्क में आने पर इससे आंखों में होने वाली जलन और असहजता कम करने में मदद मिल सकती है। उसने कहा कि उसके एक मित्र को प्रदर्शन के दौरान इससे लाभ हुआ था।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया कि वह धुएं और अन्य उत्तेजक पदार्थों के प्रभाव को कम करने के लिए पेंटर वाला मास्क या सामान्य धूलरोधी मास्क तथा सुरक्षात्मक चश्मा साथ रखता है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज से बचाव के लिए भी अपने-अपने तरीके साझा किए हैं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि उसने मार का असर कम करने के लिए अपनी पैंट के भीतर कमर और कूल्हे के आसपास थर्मोकोल की शीट रखी थीं।
उसने कहा कि वह अपने लिए एक अतिरिक्त कमीज और किसी महिला प्रदर्शनकारी के कपड़े फट जाने की स्थिति के लिए एक कुर्ता भी साथ रखता है। उसके अनुसार, वह दो हेलमेट भी लेकर चलता है, जिनमें से एक अपने लिए और दूसरा जरूरतमंद व्यक्ति को देने के लिए होता है।
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे ऐसे सुझावों से यह संकेत मिलता है कि प्रदर्शनकारी अब एक-दूसरे के अनुभवों और सामूहिक सलाह पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं।
सोमवार को संसद मार्च के दौरान छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ कई बार झड़प हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। इनमें एक महिला की हालत गंभीर होने पर उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इन झड़पों में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आह्वान पर एकत्र हुए छात्र राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
भाषा मनीषा माधव
माधव

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