आरएसएस मानहानि मामले में अदालत ने प्रियंक खरगे और नलपद को जमानत दी

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आरएसएस मानहानि मामले में अदालत ने प्रियंक खरगे और नलपद को जमानत दी

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  • Publish Date - August 29, 2026 / 07:46 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 07:46 PM IST

बेंगलुरु, 29 अगस्त (भाषा) कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की एक अदालत ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट और बयान देने से जुड़े मामले में शनिवार को गृह मंत्री प्रियंक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपद को जमानत दे दी।

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए गठित 42वीं विशेष अदालत ने आरएसएस का बचाव करने वाले ए. तेजस की ओर से दायर मानहानि मामले में खरगे एवं नलद को जमानत देते हुए दोनों को एक-एक लाख रुपये का निजी मुचलका और 10-10 हजार रुपये की नकद जमानत राशि जमा करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से वेंकटेश दलवई के साथ पेश हुए अधिवक्ता चंदन राजप्पा ने बताया कि मामले की सुनवाई शनिवार को हुई।

इस दौरान दोनों आरोपी अपने-अपने वकीलों के साथ अदालत में मौजूद थे।

शिकायतकर्ता के वकील भी अदालत में उपस्थित थे।

खरगे और नलपद के वकीलों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 478 के तहत जमानत अर्जी और नकद जमानत स्वीकार करने के लिए बीएनएसएस की धारा 490 के तहत याचिका दायर की थीं।

अधिवक्ता के अनुसार, अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356 के तहत लगाए गए आरोप जमानती हैं, इसलिए आरोपियों की ओर से दाखिल जमानत याचिकाओं को मंजूर कर लिया गया।

इसके बाद अदालत ने प्रियंक खरगे और नलपद को आरोपों का सार पढ़कर सुनाया तथा उन्हें समझाया।

दोनों ने आरोपों से इनकार किया और मुकदमे का सामना करने की इच्छा जताई, जिसके बाद अदालत ने मामले को शिकायतकर्ता के साक्ष्य के लिए 19 सितंबर को सूचीबद्ध कर दिया।

सिद्धपुरा निवासी आरएसएस कार्यकर्ता ए. तेजस ने निजी शिकायत दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि खरगे ने 14 अक्टूबर, 2025 को आरएसएस सदस्यों के खिलाफ एक पोस्ट किया था, जबकि नलपद ने एक यूट्यूब चैनल पर संगठन के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की थी।

खरगे ने अपनी पोस्ट में कथित तौर पर कहा था, ‘‘पिछले दो दिन से मेरा फोन लगातार बज रहा है। मुझे और मेरे परिवार को धमकियां, डराने-धमकाने वाली बातें और बेहद अभद्र भाषा में संदेश मिल रहे हैं। सिर्फ इसलिए, क्योंकि मैंने सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में आरएसएस की गतिविधियों पर सवाल उठाये और उन्हें रोकने की कोशिश की।’’

उन्होंने कहा था कि वह न तो इससे विचलित हुए हैं और न ही उन्हें आश्चर्य हुआ है।

खरगे ने अपनी पोस्ट में सवाल किया था, ‘‘जब आरएसएस ने महात्मा गांधी या बाबासाहेब आंबेडकर को नहीं छोड़ा, तो वह मुझे क्यों छोड़ेगा?’’

उन्होंने कहा था, ‘‘अब समय आ गया है कि बुद्ध, बसवन्ना और बाबासाहेब के सिद्धांतों पर आधारित समाज का निर्माण किया जाए। ऐसा समाज जो समानता, तर्क और करुणा पर आधारित हो तथा इस देश को सबसे खतरनाक वायरस से मुक्त किया जाए।’’

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन बयानों से आरएसएस की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

खरगे और नलपद को इससे पहले अदालत ने व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी थी, लेकिन शनिवार की सुनवाई में दोनों अदालत में उपस्थित हुए।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश