दिल्ली सरकार ने पुरातात्विक विरासत के अध्ययन, डिजिटलीकरण के लिए शोध छात्रवृत्ति को मंजूरी दी

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दिल्ली सरकार ने पुरातात्विक विरासत के अध्ययन, डिजिटलीकरण के लिए शोध छात्रवृत्ति को मंजूरी दी

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  • Publish Date - July 11, 2026 / 05:54 PM IST,
    Updated On - July 11, 2026 / 05:54 PM IST

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार ने राजधानी की ऐतिहासिक विरासत के वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेजीकरण और उसे डिजिटल रूप में सुरक्षित करने (डिजिटलीकरण) के लिए पुरालेख और पुरातत्व के क्षेत्र में शोध छात्रवृत्ति को मंजूरी दी है।

दिल्ली की यह ऐतिहासिक विरासत हजारों साल पुरानी है, जिसमें कई सभ्यताओं से जुड़े दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड, पुरातात्विक स्थल और प्राचीन इमारतें शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली न केवल देश की राजधानी है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सभ्यता की एक जीवंत धरोहर भी है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण के माध्यम से इस विरासत को सहेजना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे अधिक सुलभ बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली मंत्रिमंडल ने इतिहास, पुरातत्व और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में विशेष अध्ययन को बढ़ावा देने तथा विशेषज्ञों का एक मजबूत समूह तैयार करने के उद्देश्य से ‘पुरालेख शोध छात्रवृत्ति’ और ‘पुरातत्व शोध छात्रवृत्ति’ को मंजूरी दी है।

योजना के तहत जिन क्षेत्रों को शामिल किया गया है, उनमें रिकॉर्ड का रखरखाव, पुरालेखीय सामग्रियों का संरक्षण, सूचनाओं का प्रसार, डेटा प्रबंधन, माइक्रोफिल्मिंग (दस्तावेजों को सूक्ष्म फिल्म में सुरक्षित करना), रीप्रोग्राफी (दस्तावेजों की हूबहू नकल तैयार करना), शोध प्रकाशन और प्राच्य (पुरानी) भाषाओं, विशेष रूप से उर्दू और फारसी से जुड़े अध्ययन शामिल हैं।

इसके तहत हर साल एक वर्ष के कार्यकाल के लिए 15 शोधार्थियों (फेलो) का चयन किया जाएगा, जिन्हें 25,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की मासिक छात्रवृत्ति दी जाएगी।

भाषा सुमित माधव

माधव