नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और अन्य से न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में शुरू किए गए आपराधिक अवमानना मामले में उनका पक्ष जानना चाहा।
न्यायमूर्ति शर्मा ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आप नेताओं के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किया और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए। कथित अवमानना करने वाले नोटिस प्राप्त होने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करेंगे।’’
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को निर्धारित की।
न्यायमूर्ति शर्मा ने आबकारी नीति मामले से संबंधित मामले में उनके विरुद्ध सोशल मीडिया पर ‘‘अपमानजनक’’ पोस्ट करने के आरोप में केजरीवाल, सिसोदिया और आप के अन्य नेताओं के विरुद्ध 14 मई को आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की थी।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा था कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कानूनी उपायों का सहारा लेने के बजाय उन्हें बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया और स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर अब दूसरी पीठ सुनवाई करेगी।
न्यायाधीश ने अवमानना के आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्ट को लेकर आपत्ति जताई, जिनमें उन पर ‘‘राजनीतिक निष्ठा’’ रखने और ‘‘संबंध’’ रखने का आरोप लगाया गया था और वाराणसी के एक शैक्षणिक संस्थान में दिए गए उनके भाषण का एक भ्रामक ‘‘संपादित’’ वीडियो पोस्ट करके उन्हें कथित तौर पर निशाना बनाया गया था।
भाषा सुरभि वैभव
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