दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय कार चोरी गिरोह का भंडाफोड़ किया; तीन गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय कार चोरी गिरोह का भंडाफोड़ किया; तीन गिरफ्तार

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 10:33 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 10:33 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने कारों की चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी के पांच वाहन, 104 जाली नंबर प्लेट और 24 फर्जी पंजीकरण प्रमाण पत्र जब्त किए हैं।

उन्होंने बताया कि मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के प्रावधान लागू करने के बाद गिरोह के सरगना अमित नागर (35) को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान ए. जगत सिंह (45) और पी. मुकेश सिंह (28) के रूप में हुई है, दोनों मणिपुर के इंफाल के रहने वाले हैं।

अधिकारी ने कहा, “मुकेश सिंह और जगत सिंह ने अमित नागर से चोरी की गाड़ियां खरीदीं, जाली पंजीकरण दस्तावेजों की व्यवस्था की और कारों को मुनाफे पर बेच दिया।”

पुलिस ने कहा कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने वाहन चोरी के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज का विश्लेषण किया, अपराध स्थलों की जांच की और स्थानीय स्रोतों के माध्यम से खुफिया जानकारी हासिल की।

पुलिस ने एक बयान में बताया कि 12 मई को मुकेश को छतरपुर में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कहा कि उसके किराए के परिसर की तलाशी में 104 जाली उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट और 22 जाली पंजीकरण प्रमाण पत्र जब्त किए गए।

अधिकारी ने बताया कि उसकी निशानदेही पर वजीराबाद से चोरी की एक कार बरामद की गई।

उन्होंने बताया कि जगत सिंह को 14 मई को गिरफ्तार किया गया, और उसकी निशानदेही पर चोरी की एक कार बरामद हुई। नागर को 28 जुलाई को गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर चोरी की कार बरामद की गई।

जांच के दौरान, जांचकर्ताओं ने पाया कि आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी के वाहनों को मणिपुर, राजस्थान, पंजाब, असम और पश्चिम बंगाल में अपने सहयोगियों को भेज दिया।

जगत सिंह की निशानदेही पर 13 अगस्त को म्यांमा सीमा के पास स्थित मणिपुर के उखरुल जिले से दो और कारें बरामद की गईं।

पुलिस ने कहा कि दिल्ली से चुराए गए वाहनों को भारत-म्यांमा सीमा क्षेत्र में सक्रिय भूमिगत समूहों को बेचा जाना था।

भाषा नोमान दिलीप

दिलीप