नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि देश में राजनीतिक चर्चा की भाषा का गिरता स्तर ‘बहुत लज्जाजनक’ है। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू की जीवनयात्रा से सार्वजनिक जीवन में गरिमा का महत्व सीखने का आह्वान किया।
सिंह ने यहां डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में पूर्व उपराष्ट्रपति की हिंदी में प्रकाशित जीवनी ‘लोकप्रिय नेता वेंकैया नायडू: उदयगिरि से उपराष्ट्रपति तक’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह किताब नायडू के व्यक्तित्व, संघर्षों और जन-कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सामने लाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमें वेंकैया जी के जीवन से सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखने का महत्व सीखना चाहिए। आज राजनीतिक बातचीत की भाषा में जो गिरावट देखने को मिल रही है, वह बहुत लज्जाजनक है।’’
सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा के प्रति नायडू की प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए इसे ‘सचमुच बेमिसाल’ करार दिया। रक्षामंत्री ने कहा कि उन्होंने हमेशा व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखा।
सिंह ने कहा, ‘‘उन्होंने हमेशा अपने निजी हितों से ऊपर देशहित को रखा है। मेरा मानना है कि वेंकैया जी का जीवन ‘राष्ट्र सर्वोपरि और स्वयं सबसे अंत में’ की भावना का जीता-जागता उदाहरण है।’’
सिंह ने वेंकैया नायडू के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि हम दोनों ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम किया और बाद में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
सिंह ने राज्यसभा के सभापति के तौर पर नायडू के कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने संसद की गरिमा बढ़ाई, इसकी उत्पादकता में सुधार किया और औपनिवेशिक दौर की प्रथाओं को खत्म करने के लिए काम किया।
रक्षामंत्री ने कहा, ‘‘राज्यसभा के सभापति के तौर पर उन्होंने संसद की गरिमा बढ़ाई। उनके कार्यकाल में राज्यसभा की उत्पादकता 70 प्रतिशत बढ़ी। उन्होंने कई औपनिवेशिक प्रथाओं को खत्म करने के लिए काम किया और मातृभाषा तथा भारतीय भाषाओं को उचित सम्मान देने की वकालत की।’’
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने नायडू की एक साधारण जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से देश के उच्च संवैधानिक पदों तक की यात्रा को पार्टी कार्यकर्ताओं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।
नवीन ने कहा कि उदयगिरि से उपराष्ट्रपति बनने तक नायडू का सफर उन लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं के संघर्ष को दर्शाता है, जिन्होंने पार्टी के शुरुआती दौर में उसके लिए काम किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘जब अटलजी ने कहा था कि अंधेरा छंट जाएगा और कमल खिलेगा, तो मेरा मानना है कि लाखों कार्यकर्ताओं ने संघर्ष जारी रखा। उनके संघर्षों ने ही भाजपा को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभरने में मदद की। वेंकैया नायडू जी ने भी संघर्ष को अपने संकल्प का हिस्सा बनाया।’’
नायडू ने संसद में रचनात्मक विपक्ष की वकालत करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद व्यक्तियों के बजाय नीतियों और कार्यक्रमों पर केंद्रित होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्षी दलों की एक वाजिब भूमिका होती है, लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संसद का कामकाज चलता रहे और वे सरकार के प्रस्तावों के विकल्प भी पेश करें।
नायडू ने कहा, ‘‘विपक्ष को नीतियों और कार्यक्रमों का विरोध करना चाहिए, न कि व्यक्तियों का।’’
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री का राजनीतिक विरोध किया जा सकता है, लेकिन आलोचना को व्यक्तिगत हमलों या अपशब्दों में नहीं बदलना चाहिए।
पूर्व उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘सरकार और प्रधानमंत्री का विरोध किया जा सकता है, लेकिन उनकी नीतियों और कार्यक्रमों का विरोध करें। व्यक्तियों को अपशब्द न कहें। आलोचना करें, लेकिन विकल्प भी दें। सदन का कामकाज चलना चाहिए।’’
उन्होंने युवा पीढ़ी से सकारात्मक और रचनात्मक बने रहने तथा चरित्र, काबिलियत, क्षमता और आचरण के सिद्धांतों का पालन करने की भी अपील की।
कार्यक्रम में मौजूद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नायडू को ‘जन-नेता’बताया और कहा कि उनका पद कभी उनकी पहचान नहीं बना, बल्कि उनका संवेदनशील व्यवहार और कर्तव्य के प्रति समर्पण ही उनकी पहचान रही।
आचार्य यारलागड्डा लक्ष्मी प्रसाद द्वारा लिखी यह किताब आंध्र प्रदेश में जमीनी स्तर की राजनीति से लेकर उपराष्ट्रपति के पद तक नायडू के सफर से अवगत कराती है और उनके लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक करियर का ब्योरा देती है।
भाषा धीरज माधव
माधव