नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) उपराज्यपाल (एलजी) तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस से सक्रिय, मानवीय, ईमानदार और तकनीक आधारित पुलिस व्यवस्था के साथ जनता के बीच अपनी प्रभावी मौजूदगी सुनिश्चित करने का बुधवार को आह्वान किया
उन्होंने कहा कि पुलिस बल को विकसित भारत के विजन के अनुरूप एक पेशेवर, संवेदनशील और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले संगठन के रूप में लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए।
दिल्ली पुलिस की ‘कमिश्नरेट डे’ परेड को संबोधित करते करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ, पुलिस बल को लगातार नए तरीके अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को पुलिसिंग (पुलिस व्यवस्था) की बदलती चुनौतियों के हिसाब से खुद को ढालना चाहिए।
संधू ने दिल्ली के प्रशासक के तौर पर किंग्सवे कैंप की न्यू पुलिस लाइंस में आयोजित परेड की सलामी ली।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना दिल्ली पुलिस का मुख्य उद्देश्य रहा, जिसमें महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ज़ोर दिया गया।
उपराज्यपाल ने कहा कि खोए और चोरी हुए सामान बरामद करने और लोगों को वापस करने वाले दिल्ली पुलिस के ‘ऑपरेशन विश्वास’ ने बल में जनता के विश्वास को मजबूत किया है।
संधू ने कहा कि यातायात नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने व जनता के निरंतर सहयोग और व्यवहार में बदलाव के बिना गलत दिशा में वाहन चलाने, दो पहिया वाहन पर तीन लोगों को बैठाने और बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सकता।
सामुदायिक पुलिसिंग के महत्व पर ज़ोर देते हुए, उपराज्यपाल ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे लोगों का भरोसा जीतने के लिए नागरिकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ें।
उन्होंने कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति और पारदर्शी स्थानांतरण नीति का आश्वासन दिया। इसके अलावा, उन्होंने शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारों के लिए कल्याणकारी सहायता बढ़ाने के वास्ते कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कोष का इस्तेमाल करने जैसे नए उपाय करने को कहा।
संधू ने पुलिस में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सराहते हुए दिल्ली पुलिस महिला ‘पाइप और ब्रास बैंड’ की प्रशंसा की।
मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए, पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने कहा कि हाल के वर्षों में पुलिस बल में काफी बदलाव आया है और अब अपराध रोकने और तकनीक आधारित पुलिस व्यवस्था पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘इस साल गंभीर अपराधों में आठ प्रतिशत की कमी आई है, जबकि भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज मामलों में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। ऑनलाइन दर्ज किए जाने वाले मोटर वाहन चोरी और चोरी के अन्य मामलों में क्रमशः 21 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की कमी आई है, जो पिछले 10 वर्षों में दर्ज की गई सबसे कम संख्या है।’
गोलछा ने बताया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगभग 17 प्रतिशत की कमी आई है और मामलों के सुलझने की दर 98 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि ऐसे लगभग 95 प्रतिशत मामलों में तय कानूनी समय-सीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल किया गया।
उन्होंने कहा कि इस साल यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून (पॉक्सो) के तहत 35 मामलों और सड़क पर होने वाले अपराध के 172 मामलों में दो सप्ताह के भीतर आरोप पत्र दायर किए गए।
संगठित अपराध के बारे में आयुक्त ने कहा कि ‘ऑपरेशन गैंग बस्ट’ और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत की गई कार्रवाई ने आपराधिक नेटवर्क और उनके समर्थक तंत्र को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर अपराधों में हथियारों के इस्तेमाल में 27 प्रतिशत की कमी आई है।
‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत हाल में जारी किए गए तीन साल के ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ (2026-29) का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने शहर में नशीले पदार्थों के 123 ‘हॉटस्पॉट’ की वैज्ञानिक तरीके से पहचान की है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जुलाई महीने को ‘बाल सुरक्षा जागरूकता माह’ के तौर पर मनाया जाएगा।
समारोह के दौरान, उपराज्यपाल ने कॉन्स्टेबल विक्रम को मरणोपरांत ‘आहत वीर सम्मान पत्र’ प्रदान किया। पिछले साल अक्टूबर में शालीमार बाग फ्लाईओवर पर यातायात ड्यूटी के दौरान तेज़ रफ़्तार ट्रक की टक्कर लगने से उनकी जान चली गई थी। यह सम्मान उनकी पत्नी अनीता सिंह ने प्राप्त किया। ड्यूटी के दौरान घायल हुए नौ अन्य पुलिसकर्मियों को भी सम्मानित किया गया।
उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस के 27 कर्मियों को सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। वहीं, स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ग्रेटर कैलाश और लक्ष्मी नगर थाना को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, द्वारका, पंजाबी बाग और पुलिस मुख्यालय स्थित आवासीय परिसरों को बेहतर रखरखाव और स्वच्छता के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
एक जुलाई, 1978 को दिल्ली पुलिस कानून के तहत राजधानी में कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई थी।
भाषा नोमान नोमान पवनेश
पवनेश