हरियाणा: बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे की मौत, प्राथमिकी दर्ज

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हरियाणा: बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे की मौत, प्राथमिकी दर्ज

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  • Publish Date - July 1, 2026 / 10:37 PM IST,
    Updated On - July 1, 2026 / 10:37 PM IST

अंबाला, एक जुलाई (भाषा) हरियाणा के अंबाला जिले में 220 फुट गहरे बोरवेल में गिरे चार वर्षीय बच्चे को 21 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद बुधवार तड़के बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

पुलिस ने इस सिलसिले में खेत के मालिक और उस जमीन से जुड़े दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है जहां यह बोरवेल खोदा गया था। पुलिस लापरवाही बरतने के आरोप में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई कर रही है।

निरवैर सिंह को मंगलवार सुबह शुरू हुए विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के बाद बुधवार तड़के तीन बजकर 40 मिनट पर बोरवेल से बाहर निकाला गया और उसे तुरंत एम्बुलेंस से अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. ऋषिपाल सिंह ने बताया कि बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद घटनास्थल पर ही उसकी प्रारंभिक जांच की गई थी।

उन्होंने बताया कि बच्चे के जीवित होने के कोई संकेत नहीं मिले, जिसके बाद उसे अस्पताल लाया गया और वहां आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किए गए। हालांकि, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

डॉ. सुमित कुकरेजा उस चिकित्सकों के समूह (पैनल) के एक सदस्य हैं, जिन्होंने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम किया था।

उन्होंने बताया कि बच्चे के शव को तड़के करीब चार बजे अस्पताल लाया गया था। उसके शरीर, विशेषकर छाती, सिर और दोनों घुटनों पर चोटों और खरोंचों के निशान मिले हैं। इसके अलावा, फेफड़ों में कीचड़ वाला पानी पाया गया।

कुकरेजा के अनुसार, मौत का कारण डूबना और चोटें लगना तय किया गया है।

यह घटना मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे अंबाला जिले के धन्यौड़ा गांव में हुई। निरवैर सिंह अपने पिता मनजीत के साथ खेत में अपने दादा करनैल सिंह के लिए खाना लेकर गया था।

परिवार के अनुसार, करनैल सिंह सुबह ही खेत में काम करने चले गए थे, जबकि मनजीत बाद में उनके लिए खाना लेकर पहुंचे। निरवैर ने भी अपने पिता के साथ जाने की जिद की, जिसके बाद मनजीत उसे साथ ले गए।

खेत पर पहुंचने के बाद मनजीत काम में लग गए और करनैल सिंह खाना खाने लगे। निरवैर पहले अपने दादा के पास बैठा रहा लेकिन कुछ देर बाद खेलने लगा। खेलते-खेलते उसकी नजर खुले बोरवेल पर पड़ी और वह उसमें मिट्टी डालने लगा। माना जा रहा है कि जब वह बोरवेल के अंदर झांकने के लिए झुका, तभी आसपास की गीली मिट्टी धंस गई और उसका पैर फिसलने से वह बोरवेल में गिर गया।

मनजीत ने बताया कि अचानक तेज आवाज सुनकर उनका ध्यान उधर गया। वह तुरंत बोरवेल के पास पहुंचे और निरवैर को आवाज लगाई।

बच्चे के बोरवेल में गिरने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पहले अपने स्तर पर उसे निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर सुबह करीब साढ़े सात बजे प्रशासन को सूचना दी।

सूचना मिलते ही उपायुक्त (डीसी) अजय सिंह तोमर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद बचाव दलों ने व्यापक अभियान शुरू किया।

तोमर ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आपातकालीन बचाव दलों को मौके पर रवाना किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना और जिला प्रशासन ने बच्चे को जीवित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण भी बचाव अभियान प्रभावित हुआ।

गांव के सरपंच कप्तान सिंह ने बताया कि बच्चे के पिता मनजीत सिंह बिजली विभाग में कार्यरत हैं। मनजीत और उनकी पत्नी जसबीर कौर की एक बड़ी बेटी भी है।

उन्होंने बताया कि निरवैर का इसी वर्ष पास के भनोखेड़ी गांव के एक स्कूल में नर्सरी कक्षा में दाखिला कराया गया था।

परिवार के एक सदस्य ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में निरवैर अपनी नानी के घर गया हुआ था और स्कूल एक जुलाई से खुलने के कारण वह सोमवार को ही वापस लौटा था।

हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी मंगलवार शाम घटनास्थल पर पहुंचे थे।

अंबाला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि परिवार की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने खेत मालिक हरनेक सिंह और खेत को पट्टे पर लेने वाले दो व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106 (लापरवाही के कारण मौत होना) के तहत मामला दर्ज किया है।

परिवार का आरोप है कि बोरवेल से मोटर निकालने के बाद उसे बिना ढके ही खुला छोड़ दिया गया था।

खेत मालिक ने न तो बोरवेल के पास कोई चेतावनी बोर्ड लगाया था और न ही उसे ढका था। इसी लापरवाही के कारण निरवैर बोरवेल में गिर गया और उसकी जान चली गई।

गांव में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में निरवैर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

इस बीच, जिला प्रशासन ने संबंधित विभाग को जिले भर के खेतों में मौजूद बोरवेलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बोरवेल खुला न रहे।

उपायुक्त ने मंगलवार को कहा था कि बोरवेल को खुला छोड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस को दे दिए गए हैं।

तोमर ने किसानों से अपने खेतों में बोरवेल को खुला न छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि यदि बोरवेल ढका होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

पंजाब के होशियारपुर में भी पिछले महीने ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें चार वर्षीय एक बच्चा अपने घर के पास नए बोरवेल में गिर गया था। हालांकि, कई बचाव एजेंसियों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने करीब नौ घंटे तक चले अभियान के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के एक गांव में 2006 में बोरवेल में गिरे पांच वर्षीय प्रिंस को बचाने के लिए भी बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था। करीब 48 घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

भाषा

सुमित माधव

माधव