दिल्ली दंगा : अदालत ने साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की

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दिल्ली दंगा : अदालत ने साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की

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  • Publish Date - July 4, 2026 / 05:31 PM IST,
    Updated On - July 4, 2026 / 05:31 PM IST

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश के मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने दोनों पक्षों की ओर से दलीलें सुनने के बाद दोनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।

खालिद और इमाम ने जमानत अर्जियां दायर करते हुए दलील दी कि मुकदमा शुरू हुए बिना उन्हें लगातार जेल में रखना स्वतंत्रता के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

खालिद की याचिका में यह भी दलील दी गई कि भले ही उच्चतम न्यायालय ने उनकी पिछली अर्जी खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में हुए न्यायिक घटनाक्रम से ‘‘हालात में बदलाव’’ आया है।

उन्होंने एक दूसरे मामले में मई में अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी ‘‘जमानत ही नियम है’’।

उच्चतम न्यायालय द्वारा पांच जनवरी को यूएपीए के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार करने के बाद नयी याचिकाएं दायर की गईं।

अपनी अर्जी में इमाम ने कहा कि उच्चतम न्यायालय से जमानत न मिलने के छह महीने बाद भी मामले की कार्यवाही में कोई ‘‘खास प्रगति’’ नहीं हुई है और वह लगभग छह साल से हिरासत में हैं।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि आरोपी के लंबे समय से जेल में बंद होने के बावजूद, इस मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। खालिद ने भी अपनी याचिका में यह दलील दी है।

याचिका में आतंक से जुड़े एक मामले में उच्चतम न्यायालय के 18 मई के आदेश में की गई टिप्पणियों का जिक्र किया गया। आरोपी को जमानत देते समय, दो न्यायाधीशों की पीठ ने इस बात पर जोर दिया था कि आतंकवाद-रोधी कानून का इस्तेमाल अनिश्चित काल तक हिरासत में रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

खालिद ने दलील दी कि बाद में हुई न्यायिक घटनाओं से ‘‘हालात में बदलाव’’ आया है, जिससे उनकी मौजूदा जमानत याचिका सुनवाई योग्य है, भले ही उच्चतम न्यायालय ने उनकी पिछली याचिका खारिज कर दी थी।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश में शामिल होने के आरोप में खालिद, इमाम और कई अन्य लोगों पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

यह हिंसा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप