नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) पुलिस ने नजफगढ़ में एक प्रतिद्वंद्वी गिरोह से जुड़े व्यक्ति के सहयोगी पर चाकू हमले के आरोप में रोहित लांबा गिरोह के 22 वर्षीय कथित सदस्य को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने कहा कि गिरोहों के बीच जारी प्रतिद्वंद्विता के चलते यह हमला किया गया था।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि आरोपी आदित्य कुमार और उसके सहयोगियों रोहित लांबा तथा रितिक ठाकुर ने 26 जून को अफजल पर हमला किया था, क्योंकि उन्हें संदेह था कि उसने लांबा के ठिकानों के बारे में मोनू को सूचना दी थी।
अफजल के बारे में संदेह है कि उसका संबंध प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर मोहित भारद्वाज उर्फ मोनू से है।
पुलिस ने बताया कि अपराध को अंजाम देने के पश्चात अपने सहयोगियों के पकड़े जाने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में नजफगढ़ के धरमपुरा का निवासी आदित्य फरार था और अपने ठिकाने बदल रहा था।
इसने कहा कि 26 जून को आरोपियों का अफजल से सामना हुआ और उससे मोनू के ठिकाने के बारे में पूछा। जब अफजल ने कोई जानकारी होने से इनकार किया, तो रोहित ने कथित तौर पर उसके सिर पर पिस्तौल तान दी, जबकि रितिक ने चाकू निकाल लिया।
पुलिस के अनुसार, आदित्य ने कथित तौर पर अफजल को पकड़े रखा, जबकि रोहित और रितिक ने उस पर हमला कर दिया। गली में मोटरसाइकिल पर सवार एक व्यक्ति को आते हुए देखने के बाद आरोपी फरार हो गए।
इसके बाद, नजफगढ़ थाने ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कहा कि यह हमला लांबा और मोनू के बीच जारी प्रतिद्वंद्विता के कारण किया गया। मोनू नजफगढ़ थाने में ‘बुरे चरित्र वाले व्यक्ति’ के रूप में सूचीबद्ध है।
पुलिस ने कहा कि लगभग डेढ़ महीने पहले मोनू और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर लांबा पर चाकू से हमला किया था और तब से वे फरार थे।
स्थानीय पुलिस के साथ संक्षिप्त गोलीबारी के बाद 28 जून को लांबा और रितिक की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद से पुलिस आदित्य को ढूंढ़ रही थी।
सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए टीम ने द्वारका मोड़ के पास जाल बिछाया और कुछ देर पीछा करने के बाद आदित्य को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान आदित्य ने पुलिस को बताया कि उसने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और लगभग तीन साल पहले रिलायंस स्टोर में काम करते समय उसका संपर्क लांबा से हुआ था।
पुलिस ने कहा कि बाद में वह गिरोह का सक्रिय सदस्य बन गया और प्रतिद्वंद्वियों की पहचान करने तथा उन पर हमला करने में मदद करने लगा।
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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