दिल्ली चिड़ियाघर में जानवरों को ठंड से बचाने के लिए यूवी बल्ब, विशेष आहार की व्यवस्था

दिल्ली चिड़ियाघर में जानवरों को ठंड से बचाने के लिए यूवी बल्ब, विशेष आहार की व्यवस्था

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  • Publish Date - January 2, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - January 2, 2026 / 07:05 PM IST

(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में जारी शीतलहर के बीच जानवरों को ठंड से बचाने के लिए दिल्ली चिड़ियाघर ने कई उपाय किए हैं।

इन उपायों के तहत सांपों के चैंबर में यूवी बल्ब लगाए गए हैं। मांसाहारी जानवरों को दो किलोग्राम अतिरिक्त मांस प्रदान किया जा रहा है और शाकाहारी जानवरों को अतिरिक्त वसा एवं तेल दिया जा रहा है।

चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि सांप जैसे सरीसृप सर्दियों के दौरान शीतनिद्रा में चले जाते हैं, लेकिन उन्हें फिर भी सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है, और यूवी बल्ब प्राकृतिक प्रकाश के विकल्प के रूप में काम करते हैं।

अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘बल्ब कृत्रिम धूप प्रदान करते हैं और सांप गर्म रहने के लिए पुआल के मोटे बिस्तर पर सोते हैं। सर्दियों के मौसम के लिए भोजन की मात्रा और संरचना में संशोधन किया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘शाकाहारी जीवों को उनके आहार में अतिरिक्त वसा और तेल दिया जा रहा है, जबकि मांसाहारी जीवों को ठंड से बचाने में मदद करने के लिए 1.5 से 2 किलोग्राम अतिरिक्त मांस उपलब्ध कराया जा रहा है।’’

जानवरों को ठंडी हवा से बचाने के लिए, विभिन्न बाड़ों में विशेष रूप से डिजाइन किए गए आश्रय स्थल, लकड़ी के तख्ते, चटाई, बांस की जाली और घास-फूस के आवरण लगाए गए हैं।

अधिकारी ने बताया कि प्रजाति-विशिष्ट रणनीतियों के साथ एक विस्तृत शीतकालीन प्रबंधन योजना के हिस्से के रूप में, जानवरों के लिए उपयुक्त तापमान बनाए रखने के लिए ‘रूम हीटर’ और नमी के स्तर को संतुलित रखने वाले उपकरण भी लगाए जा रहे हैं।

कमजोर जानवरों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, चिड़ियाघर में मणिपुरी हिरण जैसी, प्रजातियों में दबदबा रखने वाले नर हिरणों को अलग रख रहा है, क्योंकि इनमें प्रजनन आमतौर पर सर्दियों के दौरान होता है।

अधिकारी ने बताया कि शाकाहारी जीवों और पक्षियों को धान के भूसे से बना आवरण और विशेष रूप से डिजाइन किए गए आश्रय प्रदान किए जा रहे हैं, जबकि मांसाहारी जीवों और ‘प्राइमेट्स’ को ठंडी सतहों से बचाने के लिए लकड़ी के तख्ते और चटाई दी जा रही हैं।

अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी चिंता का तुरंत समाधान करने के लिए पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

राजधानी के मध्य में स्थित इस चिड़ियाघर का औपचारिक उद्घाटन 1959 में हुआ था और इसमें 176 एकड़ क्षेत्र में 90 से अधिक प्रजातियों के जानवर, पक्षी और सरीसृप मौजूद हैं।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश