नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता साकेत गोखले ने बुधवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने मतदान के प्रथम चरण से पहले “एहतियात के तौर पर हिरासत” के तहत पार्टी के 1,000 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के “अनौपचारिक” निर्देश जारी किए हैं।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में संस्थागत विफलता का आरोप लगाते हुए विधानसभा चुनावों को “धांधली” करार दिया।
गोखले ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदान से पहले टीएमसी के 1,000 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को एहतियात के तौर पर हिरासत में लेने के लिए अनौपचारिक निर्देश दिए।
टीएमसी नेता ने दावा किया, “इस सूची में मौजूदा विधायक भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसमें भाजपा के एक भी नेता या कार्यकर्ता का नाम नहीं है।”
उन्होंने कहा, “ पिछले दो सप्ताह में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग (आईटी) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बंगाल में दर्जनों छापे मारे, लेकिन इनमें भी भाजपा के एक भी नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।”
गोखले ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी चुनाव में भारी जीत दर्ज करेंगे।
उन्होंने सवाल किया, “क्या किसी देश को लोकतंत्र कहा जा सकता है, जब निर्वाचन आयोग केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी का ‘गुलाम’ बन जाए?”
टीएमसी नेता ने कहा कि इस तरह के चुनाव “कमजोर तानाशाही” वाले देशों में होते हैं और जब संस्थाएं पूरी तरह विफल हो जाएं तथा अदालतें मूकदर्शक बन जाएं, तो यह चिंता का विषय है कि कब तक सब कुछ सामान्य होने का दिखावा किया जाएगा।
गोखले ने कहा, “जब लाखों लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो जाते हैं और चुनावों में धांधली होती है, तो हम दुनिया के सामने किस तरह के ‘लोकतंत्र की जननी’ होने का दावा कर रहे हैं?”
इस बीच, सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर यह आशंका जताई गई है कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर टीएमसी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है और अदालत से हस्तक्षेप की अपील की गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीट के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा। मतगणना चार मई को होगी।
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