नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दबाव वाली संपत्तियों के लिए समाधान पेशेवर एवं परिसमापक के रूप में काम करने वाले जितेश गुप्ता बुधवार को धनशोधन रोधक कानून के तहत गिरफ्तार किया है। ईडी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
दिवाला समाधान पेशेवर गुप्ता दो कंपनियों-‘होमस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट’ और ‘गोल्डन पीकॉक रेजिडेंस’ के लिए समाधान पेशेवर और परिसमापक के तौर पर काम कर रहा था।
इन दोनों कंपनियों के खिलाफ दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया चल रही थी।
संघीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि देश में प्रीमियम बासमती चावल का प्रसंस्करण करने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक, ‘बेस्ट फूड्स’ के खिलाफ़ जांच से जुड़े धनशोधन मामले में यह गिरफ्तारी की गई।
ईडी का यह मामला धनशोधन रोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया है। यह मामला ‘बेस्ट फ़ूड्स’ के प्रवर्तक दिनेश गुप्ता के ख़िलाफ सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित है। दिनेश गुप्ता पर आरोप है कि उसने मुखौटा कंपनियों के ज़रिये बैंक ऋण का पैसा दूसरी जगहों पर लगाया। ईडी ने अगस्त 2025 में दिनेश गुप्ता को गिरफ़्तार किया था।
निदेशालय का दावा है कि जितेश गुप्ता ने आईआरपी/आरपी के तौर पर, अपनी मर्ज़ी से उन दावों को फिर से मंज़ूरी दे दी, जिन्हें उसने पहले फ़र्जी और धोखाधड़ी वाला बताकर खारिज कर दिया था।
ईडी ने कहा कि इस कार्रवाई से ऋणदाताओं की समिति की संरचना बदल गई और इससे ऐसी समाधान योजना को मंजूरी का रास्ता साफ हुआ, जिसे दिनेश गुप्ता की ओर से सामने रखे गए व्यक्ति के नाम पर पेश किया गया था और जिसका पैसा उसके नियंत्रण वाली एक संस्था के जरिये लगाया गया था।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि जितेश गुप्ता ने दिनेश गुप्ता से जुड़े एक व्यक्ति को संभावित समाधान आवेदक के तौर पर भी सिफारिश की थी।
भाषा
राजकुमार अजय
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