ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों, पूर्व अधिकारियों के खिलाफ दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया

ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों, पूर्व अधिकारियों के खिलाफ दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया

ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों, पूर्व अधिकारियों के खिलाफ दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया
Modified Date: August 9, 2026 / 06:05 pm IST
Published Date: August 9, 2026 6:05 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को कहा कि उसने रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) की कंपनियों और पूर्व अधिकारियों से जुड़े धन शोधन के दो अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया है।

पहले मामले में, शनिवार को द्वारका स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस समूह के पूर्व कार्यकारी अधिकारी सतीश सेठ (70) और अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई।

ईडी ने सेठ को जून में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में रिलायंस समूह छोड़ दिया था।

दूसरे मामले में, संघीय एजेंसी ने शनिवार को राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के संबंध में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। इस मामले में ईडी ने मुख्य आरोपपत्र मार्च में दाखिल किया था।

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि पीएमएलए के तहत दाखिल इस अभियोजन शिकायत में आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल), आरएएजी के पूर्व अधिकारियों सेठ, गौतम दोशी, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को आरोपी बनाया गया है।

ईडी ने दोशी को जून में और सेठ को जुलाई में गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

दोशी ने वर्ष 2020 में आरएएजी छोड़ दिया था।

अनिल अंबानी समूह की ओर से बयान का इंतजार है। वहीं, नामजद पूर्व आरएएजी अधिकारियों से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े पहले मामले में दाखिल आरोपपत्र फरवरी में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की प्राथमिकी पर आधारित है। इसमें आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर छद्म कंपनियां बनाई और संचालित की गईं। इन कंपनियों के जरिए अधिक मूल्य वाले हीरा निर्यात में काल्पनिक चालानों की आड़ में धन का हस्तांतरण और विदेशों में धन भेजने का काम किया गया।

ईडी ने कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सौंपी गई चार टोल रोड परियोजनाओं त्रिची-करूर (एनएच-67), त्रिची-दिंडीगुल (एनएच-45), सलेम-उलुंदरपेट (एनएच-68) और जयपुर-रींगस (एनएच-11) से जुड़े सार्वजनिक धन को ‘‘दूसरे कामों में लगाने’’ के लिए एक ‘‘सुनियोजित साजिश’’ रची गई थी।

पूरक आरोपपत्र केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कई प्राथमिकी पर आधारित है। इन प्राथमिकी में आरकॉम, आरटीएल और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड द्वारा ऋण सुविधाओं के कथित दुरुपयोग और हेराफेरी के आरोप हैं।

जांच में पाया गया कि ‘‘स्वीकृत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने के बजाय नयी ऋण सुविधाओं का बार-बार धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से इस्तेमाल पहले से मौजूद घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, धन की हेराफेरी और पुराने ऋणों को बनाए रखने के लिए किया गया।’’

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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