नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा सरकार की निधियों से 590 करोड़ रुपये के कथित गबन और कुछ अन्य संस्थाओं के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा के दो पूर्व कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। ईडी ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा के पूर्व प्रबंधक ऋषभ ऋषि और पूर्व संपर्क अधिकारी अभय कुमार को सोमवार को हिरासत में ले लिया गया।
बयान में कहा गया है कि दोनों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 21 मई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने कहा कि अब तक की गई जांच में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की संबंधित शाखा में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दो निजी स्कूल के बैंक खातों से 645 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि ऋषि ने अपने निजी सहायक और ड्राइवर के नाम पर कैपको फिनटेक सर्विसेज और आरएस ट्रेडर नाम की फर्जी कंपनियां बनाईं।
ईडी ने दावा किया कि कुमार ने भी अपनी पत्नी और एक रिश्तेदार के नाम पर स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स नाम की फर्जी कंपनी बनाई थी।
जांच एजेंसी ने कहा कि इन फर्जी कंपनियों को विभिन्न सरकारी खातों से “सीधे तौर पर गबन” की गई सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई, जिसमें बाद में “कई स्तर पर हेरफेर” की गई।
उसने कहा कि धन के पूरे लेन-देन का पता लगाने और गबन की गई राशि से अर्जित संपत्तियों तथा अन्य लाभार्थियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
धन शोधन का यह मामला हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो की ओर से दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है।
ब्यूरो ने अपनी जांच के तहत छह बैंक कर्मचारियों और एक सरकारी अधिकारी सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
भाषा पारुल अविनाश
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