एआई के दौर में भी एमबीए डिग्री पर नियोक्ताओं का भरोसा बरकरार : रिपोर्ट

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एआई के दौर में भी एमबीए डिग्री पर नियोक्ताओं का भरोसा बरकरार : रिपोर्ट

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  • Publish Date - June 28, 2026 / 06:47 PM IST,
    Updated On - June 28, 2026 / 06:47 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कारण बिजनेस स्कूलों से निकलने वाले स्नातकों की उपयोगिता कम होने की आशंकाओं के बावजूद दुनिया भर के नियोक्ताओं का एमबीए डिग्री पर भरोसा कायम है। ‘ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल’ (जीएमएसी) की एक नयी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

यह रिपोर्ट जीएमएसी के वार्षिक वैश्विक कॉर्पोरेट भर्ती सर्वेक्षण पर आधारित है। जीएमएसी ‘ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट’ आयोजित करने के साथ-साथ दुनिया के प्रमुख बिजनेस स्कूलों का एक शीर्ष संगठन भी है।

रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न उद्योगों में आधे से अधिक नियोक्ताओं ने इस बात से सहमति जताई या प्रबल सहमति व्यक्त की कि नयी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के दौर में बिजनेस मैनेजमेंट की स्नातक डिग्री पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

हालांकि, नियोक्ताओं ने एक ऐसे क्षेत्र को लेकर साझा चिंता भी जताई है, जिसे अब नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है। यह क्षेत्र है ‘पेशेवर व्यवहार’ (प्रोफेशनलिज्म)।

इस सर्वेक्षण में 39 देशों के 621 भर्ती अधिकारियों और नियुक्ति प्रबंधकों ने भाग लिया। इनमें से आधे से अधिक दुनिया की सर्वाधिक राजस्व अर्जित करने वाली ‘ग्लोबल फॉर्च्यून 500’ कंपनियों से जुड़े थे।

सर्वेक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों ने एमबीए और वित्त, प्रबंधन तथा डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में विशेषीकृत बिजनेस मास्टर डिग्रियों को शामिल करने वाली ‘ग्रेजुएट मैनेजमेंट एजुकेशन’ (जीएमई) पर कम से कम कुछ हद तक भरोसा जताया।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वर्ष 2025 में 99 प्रतिशत नियोक्ताओं ने यह भरोसा जताया था कि जीएमई उनके संगठनों में सफल होने के लिए स्नातकों को तैयार करने में सक्षम है। वर्ष 2026 में एक भी उत्तरदाता ऐसा नहीं था, जिसने इस पर बिल्कुल भी भरोसा न होने की बात कही हो। इससे पता चलता है कि उद्योग जगत आज भी जीएमई के महत्व को स्वीकार करता है।’’

जब नियोक्ताओं से पूछा गया कि उन्हें जीएमई स्नातकों पर भरोसा क्यों है, तो अधिकांश ने कहा कि ये स्नातक जटिल वैश्विक कारोबारी माहौल से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम होते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘यह कारण सातवें स्थान से बढ़कर सबसे प्रमुख कारण बन गया है। वर्ष 2026 में लगभग तीन-चौथाई उत्तरदाताओं ने वैश्विक जटिलताओं के बीच सफलतापूर्वक काम करने की जीएमई स्नातकों की क्षमता की सराहना की। यह वृद्धि नियोक्ताओं के क्षेत्र या उद्योग की परवाह किए बिना देखी गई।’’

रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि जटिल वैश्विक परिस्थितियों से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, लेकिन संचार कौशल और रणनीतिक सोच जैसे बिजनेस स्कूलों में विकसित होने वाले कुछ प्रमुख कौशलों को लेकर नियोक्ताओं के भरोसे में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

इसमें कहा गया है कि ऐसे समय में जब एआई सामग्री तैयार कर सकता है, डेटा का विश्लेषण कर सकता है और नियमित कार्यों को स्वचालित बना सकता है, तब संचार क्षमता, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की योग्यता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता जैसे विशिष्ट मानवीय गुणों की अहमियत और बढ़ गई है, क्योंकि इनकी नकल करना कठिन है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘बिजनेस स्कूलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश केवल यह नहीं है कि उन्हें एआई से जुड़े कौशल सिखाने चाहिए, हालांकि इस क्षेत्र में कमी वास्तविक है और बढ़ रही है। बल्कि उन्हें ऐसे स्नातक तैयार करने होंगे, जो तकनीकी दक्षता और मानवीय निर्णय क्षमता के संगम पर आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें।’’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर आधे से अधिक नियोक्ताओं का मानना है कि दूरस्थ या ‘हाइब्रिड’ कार्य प्रणाली अपनाने वाले व्यवसायों में बिजनेस डिग्री से प्राप्त कौशल पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और औषधि उद्योगों में यह धारणा अधिक मजबूत है।

हालांकि कुल मिलाकर जीएमई के प्रति नियोक्ताओं का भरोसा मजबूत बना हुआ है, लेकिन पेशेवर व्यवहार को लेकर उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘नियोक्ताओं से पूछा गया कि क्या आज के जीएमई स्नातक विश्वसनीयता, सम्मानजनक व्यवहार, जवाबदेही और पेशेवर प्रस्तुति जैसे मानकों पर पहले के स्नातकों के समान हैं। परिणामों से इस धारणा में उल्लेखनीय बदलाव का संकेत मिला। सांख्यिकीय रूप से यह पाया गया कि ऐसे नियोक्ताओं की संख्या में कमी आई है, जो मानते हैं कि आज के जीएमई स्नातकों में पहले जैसी पेशेवर गुणवत्ता है।’’

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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