(अनिल भट्ट)
जम्मू, 30 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश की रहने वाली ज्योति नाम की एक दिव्यांग महिला पिछले आठ साल से हाथ से चलने वाली ट्राइसाइकिल के सहारे जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में समुद्र तल से 9,500 फुट से अधिक ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा कर रही है।
वहीं, राज्य के महोबा जिले का रहने वाला सुनील कुमार नामक तीर्थयात्री समुद्र तल से 13,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर तक अपनी ‘दंडवत यात्रा’ के जरिये सुर्खियां बंटोर रहा है। ‘दंडवत यात्रा’ सनातन धर्म में एक बेहद कठिन और पवित्र धार्मिक साधना है, जिसमें श्रद्धालु जमीन पर साष्टांग लेटकर शरीर को आगे खिसकाते हुए तीर्थयात्रा पूरी करते हैं।
ज्योति और सुनील मचैल माता और अमरनाथ मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा करने के इच्छुक श्रद्धालुओं के बीच आस्था, हौसले और समर्पण की अटूट मिसाल बनकर उभरे हैं।
ज्योति ने 2015 में एक रेल हादसे में दोनों पैर गंवा दिए थे। वह अपनी मां, पालतू बंदर बजरंगी और पालूत कुत्ते कालू के साथ एक बार फिर मचैल माता मंदिर की दुर्गम यात्रा पर निकली है।
ज्योति ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले से लगभग दो महीने पहले अपनी ट्राइसाइकिल के जरिये यह तीर्थयात्रा शुरू की थी। वह कहती है, “मैं पिछले आठ साल से मचैल माता मंदिर के दर्शन कर रही हूं। मैंने 2018 में पहली बार यह तीर्थयात्रा की थी और तब से हर साल इसी ट्राइसाइकिल के जरिये मचैल माता और बाबा अमरनाथ, दोनों के दर्शन करने जाती हूं।”
ज्योति के मुताबिक, वह देवी-देवताओं से अपने लिए कुछ नहीं मांगती। वह कहती है, “मेरी बस यही प्रार्थना है कि लोग सही रास्ते पर चलें, अपने परिवार का ध्यान रखें और माता रानी का आशीर्वाद उन पर बना रहे।”
ज्योति के अनुसार, इस साल ‘बजरंगी’ और ‘कालू’ भी उनके साथ तीर्थयात्रा पर आए हैं। उन्होंने बताया कि ‘बजरंगी’ की मां की बिजली का झटका लगने से मौत हो गई थी, जिसके बाद से वह उसके परिवार का हिस्सा बन गया, जबकि ‘कालू’ चार महीने से उसके साथ है।
किश्तवाड़ जिले की पद्दार घाटी के मचैल गांव में स्थित प्राचीन मचैल माता मंदिर देवी चंडी को समर्पित है, जिन्हें दुर्गा का एक रूप माना जाता है। हिमालय की गोद में बसा यह मंदिर हर साल अगस्त में हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिनमें से ज्यादातर जम्मू क्षेत्र से आते हैं।
इस साल वार्षिक मचैल माता मंदिर तीर्थयात्रा 25 जुलाई को शुरू होनी थी। हालांकि, यह दो दिन की देरी से यानी 27 जुलाई को आरंभ हुई।
महोबा निवासी सुनील बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ स्थित पवित्र गुफा मंदिर तक ‘दंडवत यात्रा’ कर रहे हैं। वह अपनी तीर्थयात्रा के 414वें दिन थर्माकोल की शीट पर पेट के बल रेंगते हुए अनंतनाग पहुंचे।
सुनील ने कहा, “मैं पवित्र अमरनाथ धाम की ‘दंडवत यात्रा’ कर रहा हूं। आज मेरी यात्रा का 414वां दिन है। बाबा अमरनाथ ने मुझे बुलाया है।”
उन्होंने तीर्थयात्रा के दौरान भरपूर सहयोग देने के लिए सुरक्षा बलों का आभार जताया।
सुनील ने कहा, “सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) जवान मुझे पूरा सहयोग दे रहे हैं। वे अमरनाथ मंदिर तक पहुंचने में मेरा सहयोग जारी रखेंगे।”
इस साल अमरनाथ मंदिर की 57 दिन लंबी वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई को शुरू हुई थी। अब तक 4.36 लाख से अधिक तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यह तीर्थयात्रा 28 अगस्त तक चलेगी।
भाषा पारुल नरेश
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