बांग्लादेश में हथियार लूटे जाने के कारण चुनावी हिंसा की आशंका बढ़ गई है : विशेषज्ञ

बांग्लादेश में हथियार लूटे जाने के कारण चुनावी हिंसा की आशंका बढ़ गई है : विशेषज्ञ

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 05:43 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 05:43 PM IST

नयी दिल्ली/ढाका, 20 जनवरी (भाषा) बांग्लादेश में 2024 की हिंसा के दौरान लूटे गए लगभग 15 प्रतिशत हथियारों और लगभग 30 प्रतिशत गोला-बारूद का अब तक अता-पता नहीं चल सका है, ऐसे में सुरक्षा विशेषज्ञों ने वहां चुनावों से पहले हिंसा की घटनाएं बढ़ने की आशंका को लेकर चिंता जताई है।

समाचार पोर्टल ‘टीबीएसन्यूज डॉट नेट’ ने मंगलवार को बताया कि जुलाई-अगस्त 2024 में हुए विद्रोह के दौरान कानून प्रवर्तन प्रतिष्ठानों पर व्यापक हमलों के बाद बांग्लादेश में पुलिस थानों, चौकियों, वाहनों और हवालातों से 5,753 हथियार तथा लगभग 6,51,609 गोला-बारूद लूट लिये गए। इस विद्रोह के कारण शेख हसीना सरकार भी गिर गई थी।

खबर में कहा गया है कि हथियारों की बरामदगी के लिए साल भर अभियान चलाये जाने के बावजूद, 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत तक कम से कम 1,362 हथियार और करीब 2,50,000 गोला-बारूद का अब भी अता-पता नहीं चल सका है।

लूटे गए हथियारों में राइफल, सब-मशीन गन, शॉटगन, पिस्तौल, आंसू गैस लॉन्चर और अन्य हथियार शामिल हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले राजनीति से प्रेरित गोलीबारी की घटनाओं में वृद्धि होने के अलावा हजारों लूटे गए हथियारों का अब तक कोई पता न लग पाना गंभीर चिंता का विषय है।

समाचार पोर्टल के अनुसार, बांग्लादेश पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक मुहम्मद नूरुल हुदा ने कहा, ‘‘चुनावों की ओर बढ़ते हुए, देश में लापता हथियार वास्तव में एक गंभीर और वास्तविक चिंता का विषय हैं। समग्र सुरक्षा स्थिति अब तक पूरी तरह से स्थिर नहीं हुई है और हाल के महीनों में कई राजनीतिक हत्याएं हुई हैं।’’

‘बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड सिक्योरिटी स्टडीज’ के अध्यक्ष मेजर जनरल एएनएम मुनीरुज्जमान (सेवानिवृत्त) ने भी उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि अशांति के एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कानून प्रवर्तन एजेंसियों की संचालन क्षमता कमजोर बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि लूटे गए हथियारों का एक बड़ा हिस्सा अब तक बरामद नहीं हुआ है। चुनाव से पहले आवश्यक कानून व्यवस्था बनाए रखने में यह एक बड़ी चुनौती होगी।

समाचार पोर्टल की खबर के अनुसार, बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा के बढ़ने का पुराना इतिहास रहा है।

भाषा यासिर सुभाष

सुभाष