धारा 370 को लेकर महबूबा मुफ्ती का बड़ा बयान, कहा- खत्म हो जाएगा भारत, जम्मू-कश्मीर का रिश्ता

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धारा 370 को लेकर महबूबा मुफ्ती का बड़ा बयान, कहा- खत्म हो जाएगा भारत, जम्मू-कश्मीर का रिश्ता

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  • Publish Date - March 30, 2019 / 11:01 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:48 PM IST

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के चलते देशभर की सियासी गलियारों में सरगर्मी बढ़ी हुई है। देशभर के नेता अलग—अलग मुद्दों को लेकर जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने धारा 370 को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार धारा 370 को खत्म करती है तो फिर से एक नए रिश्ते की शुरुआत करनी होगी। नए नियम और नए शर्त होंगे, लेकिन सोचने वाली बात यह होगी कि एक मुस्लिम बहुमत वाला राज्य, क्या यह आपके साथ भी रहना चाहेगा? धारा 370 के खत्मे के साथ ही एक मुस्लिम बहुमत वाले राज्य जम्मू कश्मीर से भारत का रिश्ता खत्म हो जाएगा।

<blockquote class=”twitter-tweet” data-lang=”en”><p lang=”en” dir=”ltr”><a href=”https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw”>#WATCH</a> Mehbooba Mufti: If you break that bridge (Art 370)…then you will have to renegotiate relationship b/w India-Jammu&amp;Kashmir, there will be new conditions…A Muslim majority state, would it even want to stay with you?…If you scrap 370, your relation with J&amp;K will be over <a href=”https://t.co/HlAMZh3KcC”>pic.twitter.com/HlAMZh3KcC</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href=”https://twitter.com/ANI/status/1111930747206684673?ref_src=twsrc%5Etfw”>March 30, 2019</a></blockquote>
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जानिए क्या है धारा 370
भारतीय संविधान की धारा 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करती है। धारा 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद यानी धारा है, जो जम्मू-कश्मीर को भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार प्रदान करती है। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। 1947 में विभाजन के समय जब जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई तब जम्मू-कश्मीर के राजा हरिसिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे। इसी दौरान तभी पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने वहां आक्रमण कर दिया जिसके बाद उन्होंने भारत में विलय के लिए सहमति दी।

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जम्मू कश्मीर के पास क्या विशेष अधिकार हैं

  • धारा 370 के प्रावधानों के मुताबिक संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है।
  • किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की सहमति लेनी पड़ती है।
  • इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
  • 1976 का शहरी भूमि कानून भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
  • भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। धारा 370 के तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है।
  • भारतीय संविधान की धारा 360 यानी देश में वित्तीय आपातकाल लगाने वाला प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
  • जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना उस वक्त की बड़ी जरूरत थी। इस कार्य को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर की जनता को उस समय धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार दिए गए थे। इसी की वजह से यह राज्य भारत के अन्य राज्यों से अलग है।

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धारा 370 की बड़ी बातें

  • जम्मू-कश्मीर का झंडा अलग होता है।
  • जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।
  • जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं है। यहां भारत की सर्वोच्च अदालत के आदेश मान्य नहीं होते।
  • जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाएगी।
  • यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती है, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है।
  • धारा 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।
  • जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
  • जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता है। जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल होता है।
  • भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती है।
  • जम्मू-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है।
  • जम्मू-कश्मीर में पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं है।
  • धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू नहीं होता।
  • जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू नहीं होता है। यहां सीएजी (CAG) भी लागू नहीं है।
  • जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले चपरासी को आज भी ढाई हजार रूपये ही बतौर वेतन मिलते हैं।
    कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता है।