नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) की “सफलता की कहानी” का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि गोलगप्पे और सब्जी बेचने वाले लोग भी पार्टी नेता राहुल गांधी से कहीं ज्यादा समझदार हैं।
भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता पी चिंदमबरम ने यूपीआई की शुरुआत का मजाक उड़ाया था, जबकि बीते एक दशक में यह दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बनकर उभरा है।
यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को की गई थी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चिदंबरम ने यूपीआई को एक “बड़ी गलती” बताया था और दावा किया था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
पात्रा संसद में चर्चा के दौरान पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम की ओर से यूपीआई के बारे में की गई उस टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब लोग डिजिटल भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “चिदंबरम जी, आपके क्षेत्र में, मेरे क्षेत्र में और देश के हर हिस्से में सब्जी बेचने वाली ‘अम्मा’ भी राहुल गांधी से कहीं ज्यादा समझदार है।”
उन्होंने कहा, “चिदंबरम ने गोलगप्पे बेचने वालों का मजाक उड़ाया था। आज गोलगप्पे की दुकानों पर भी पेटीएम से भुगतान की सुविधा मौजूद है। गोलगप्पा बेचने वाले भी राहुल गांधी से कहीं ज्यादा समझदार है। राहुल गांधी को उनसे सीखना चाहिए।”
पात्रा ने कहा, “सब्जी बेचने वाले की समझ को कमतर करके मत आंकिए। छोटे-मोटे काम करने वाले की समझ को भी कमतर करके मत आंकिए। लोग गांधी परिवार और उसके वंशजों से कहीं ज्यादा समझदार हैं।”
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी चिदंबरम की टिप्पणी से जुड़ा वीडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट किया और लिखा, “उन्हें गलत साबित करने के 10 साल पूरे हुए।”
वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए दावा किया कि आज भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा जिस बुनियाद पर खड़ा है, उसकी आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ही रखी थी।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “और सबसे जरूरी बात, आइए उन छोटी सोच वाले और श्रेय लेने के भूखे लोगों को नजरअंदाज करें, जो काम तो बहुत कम करते हैं, लेकिन बातें बहुत ज्यादा करते हैं-भले ही वे ‘टेलीप्रॉम्प्टर’ की मदद से ऐसा करते हों।”
पात्रा ने यूपीआई की “सफलता की कहानी” बयां करते हुए कहा कि शुरुआत में यूपीआई के जरिये 1.78 करोड़ लेन-देन हुए थे, जिनका कुल मूल्य ₹0.07 लाख करोड़ था।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में यूपीआई से किए जाने वाले लेन-देन की संख्या 2016-17 के 1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ हो गई, जो इसमें 13,000 गुना की जबरदस्त बढ़ोतरी को दिखाता है।
पात्रा ने कहा कि 2025-26 में यूपीआई के जरिये हुए लेन-देन का कुल मूल्य बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया, जबकि 2016-17 में यह केवल ₹0.07 लाख करोड़ था, यानी इससमें करीब 4,000 गुना बढ़ोतरी हुई।
उन्होंने कहा, “आज यूपीआई रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मंच बन गया है और यह 11 देशों में उपलब्ध है। यूपीआई सुविधा उपलब्ध कराने वाले बैंकों की संख्या भी 2016-17 में 44 से बढ़कर आज 703 हो गई है।”
यूपीआई की वृद्धि की सराहना करते हुए पात्रा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तंज कसा। इसके लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘सिलसिला’ के एक मशहूर गाने की कुछ पंक्तियों का इस्तेमाल किया।
पात्रा ने कहा, “ये कहां आ गए हम यूं ही साथ चलते-चलते! सिलसिला! वो गाना याद आ रहा है। कौन साथ चल रहा है? जनता और मोदी जी; जनता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार।”
उन्होंने कहा, “दूसरी ओर, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) है। वे कहते हैं : ‘तुम होते तो ऐसा होता, तुम होते तो वैसा होता।’ इससे उनका मतलब यह है कि अगर वे सत्ता में होते, तो शायद व्हॉट्सएप का नाम ‘राजीव गांधी गप-शप योजना’ रखा जाता और हर प्रतिमा का नामकरण गांधी परिवार के नाम पर किया जाता।”
भाषा पारुल नरेश
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