गुजरात: जबरन वसूली मामले में दोषी नवजात की मां को उच्च न्यायालय से जमानत

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गुजरात: जबरन वसूली मामले में दोषी नवजात की मां को उच्च न्यायालय से जमानत

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 07:58 PM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 07:58 PM IST

अहमदाबाद, दो जुलाई (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जबरन वसूली और मारपीट के एक मामले में उस महिला किसान की जमानत अर्जी मंजूर कर ली, जिसका बच्चा नवजात है। वह आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चैतर वसावा समेत उन नौ लोगों में शामिल थी, जिन्हें जून में एक अदालत ने जबरन वसूली और मारपीट के मामले में सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।

न्यायमूर्ति वी.के. व्यास ने नौ दोषियों में से पांच की ओर से दायर दोषसिद्धि को चुनौती देने और सजा पर रोक लगाने संबंधी अपील पर सुनवाई के दौरान शकुंतला बलिराम वसावा को जमानत दे दी।

सरकारी वकील हार्दिक दवे ने सुनवाई की शुरुआत में अदालत को बताया कि महिला के पास देखभाल के लिए 18 दिन का नवजात शिशु है, इसलिए उसे राहत दी जा सकती है।

जमानत अर्जी दायर करने वाले पांचों अपीलकर्ता किसान हैं। उन्हें वन भूमि पर अवैध खेती करने, गुजरात वन विभाग के अधिकारियों को धमकाने और उनसे जबरन वसूली करने का दोषी ठहराया गया था।

इन पांच अपीलकर्ताओं ने मामले के अन्य चार दोषियों आप विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी, उनके निजी सहायक (पीए) जितेंद्र वसावा और रिंकेश वसावा को अपनी जमानत याचिका में शामिल नहीं किया।

पांचों दोषियों की ओर से पेश अधिवक्ता आई.ए. सैयद ने अदालत से महिला के पति बलिरामभाई वसावा को भी जमानत देने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि महिला की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

अभियोजन पक्ष ने इस अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि अन्य दोषियों के मामलों पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जानी चाहिए। इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

नर्मदा जिले के राजपीपला स्थित एक सत्र अदालत ने 23 जून को सरकारी वन भूमि पर अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई के बाद वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट करने और उनसे 60,000 रुपये की जबरन वसूली करने के मामले में आप विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी, उनके निजी सहायक (पीए) और छह अन्य को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।

अदालत ने सभी आरोपियों को वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट, आपराधिक धमकी देने और उनसे जबरन वसूली करने का दोषी ठहराया था।

अभियोजन के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारियों ने सरकारी वन भूमि पर अवैध रूप से उगाई गई फसल हटाने की कार्रवाई की थी और इस संबंध में मामला भी दर्ज किया था। इसके बाद 30 अक्टूबर, 2023 को अधिकारियों को नर्मदा जिले के देडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र में स्थित चैतर वसावा के आवास पर बुलाया गया था।

अभियोजन के अनुसार, वहां वन विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई, विपक्षी विधायक ने उन्हें थप्पड़ मारा और जान से मारने की धमकी दी। भय पैदा करने के लिए कथित तौर पर हवा में गोली भी चलाई गई।

अभियोजन का आरोप है कि अगले दिन वन विभाग के अधिकारियों पर दबाव डालकर उनसे 60,000 रुपये वसूले गए।

इस घटना के संबंध में दो नवंबर, 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

भाषा राखी सुरेश

सुरेश