हरियाणा: जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस विकसित किया गया

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हरियाणा: जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस विकसित किया गया

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 05:07 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 05:07 PM IST

चंडीगढ़, तीन जून (भाषा) हरियाणा में विशेष रूप से गठित रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद (आरजेएसएफ) इकाई ने पिछले एक दशक में जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस विकसित किया है और उनकी गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रख रही है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि इस इकाई का गठन रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जैसे अपराध-संवेदनशील जिलों की समस्याओं से निपटने के लिए किया गया है।

हरियाणा पुलिस ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य संगठित अपराध को जड़ से खत्म करना, आपराधिक गतिविधियों की तत्काल निगरानी करना और संभावित अपराधों के घटित होने से पहले ही रोकना है।

हाल में पंचकूला के सेक्टर-छह स्थित पुलिस मुख्यालय में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस पहल पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में राज्य पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान, पुलिस महानिरीक्षक (रोहतक रेंज) सिमरदीप सिंह ने आरजेएसएफ इकाई के कामकाज के तौर-तरीके और उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

उन्होंने बताया कि डीजीपी सिंघल के निर्देश पर, इस इकाई को सर्वप्रथम रोहतक जिले में एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू किया गया था।

प्रारंभिक चरण में उल्लेखनीय परिणाम मिलने से उत्साहित होकर, इस मॉडल का बाद में झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद तक विस्तार किया गया। यह इकाई अब चारों जिलों में एक समर्पित खुफिया-आधारित अपराध नियंत्रण तंत्र के रूप में कार्य करती है और इसे बाद में अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है।

आरजेएसएफ इकाई ने पिछले दस वर्षों में हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल 10,892 अपराधियों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया है।

हर प्रविष्टि में अपराधी का आपराधिक इतिहास, ज्ञात गतिविधियां, सहयोगी, सामाजिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति और कई अन्य प्रासंगिक विवरण शामिल हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इकाई ने न केवल इन व्यक्तियों की सूची बनाई है, बल्कि उन्हें जोखिम स्तर के आधार पर वर्गीकृत भी किया है, जिससे पुलिस यह आकलन कर सकती है कि किन अपराधियों के दोबारा अपराध करने की संभावना है और किन व्यक्तियों के संगठित आपराधिक नेटवर्क में शामिल होने का अधिक खतरा है।

बैठक में हरियाणा विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की उपलब्धियों की समीक्षा भी की गई।

एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बैठक में बताया कि गैंगस्टरों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत, 2024 में 323 गिरोह सदस्यों और अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, 2025 में 470 और एक जनवरी से 28 मई 2026 के बीच 148 गिरफ्तारियां हुईं- जिससे तीन वर्षों में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 941 हो गई है।

उन्होंने इसे संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश