उच्च न्यायालय ने मां की हत्या के मामले में विधि स्नातक को अपने बेटे की देखभाल के लिए जमानत दी
उच्च न्यायालय ने मां की हत्या के मामले में विधि स्नातक को अपने बेटे की देखभाल के लिए जमानत दी
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी मां की हत्या की आरोपी एक विधि स्नातक को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उसके सात वर्षीय बच्चे को उसके पूर्व पति के रिश्तेदारों के पास छोड़ दिये जाने के कारण उसे प्राकृतिक अभिभावक की देखभाल से वंचित किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि 28 वर्षीय इस महिला आरोपी का पूर्व पति बच्चे की देखभाल नहीं कर रहा है, ऐसे में जमानत याचिका पर मानवीय आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने बुधवार को अपने आदेश में कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में लंबे समय तक कारावास का सीधा असर बच्चे के कल्याण पर पड़ता है और वह अपने प्राकृतिक अभिभावक की देखभाल एवं निगरानी से वंचित हो जाता है। इसलिए, जमानत की याचिका पर मानवीय आधार पर भी विचार किया जाना चाहिए।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर 2022 में कथित तौर पर अपनी मां की हत्या कर दी थी क्योंकि वह उसके किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध के खिलाफ थी।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि इसे अज्ञात हमलावरों द्वारा लूट का रंग देने के लिए, आरोपियों ने परिसर से आभूषण और नकदी निकाल ली थी तथा पहचान से बचने के लिए खून से सने अपने कपड़े फेंक दिए थे।
महिला को घटना के एक दिन बाद 20 फरवरी, 2022 को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।
आरोपी ने इस आधार पर जमानत मांगी कि वह एक युवा एकल मां है, जिसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उसके पति ने उसे तलाक दे दिया है एवं बाद में उसने दूसरी शादी कर ली ।
महिला ने कहा कि उसका सात साल का बच्चा फिलहाल उसके पूर्व पति के रिश्तेदारों के पास है, जहां उसे उचित देखभाल या सहायता नहीं मिल रही है। आरोपी ने कहा कि उसकी रिहाई ज़रूरी है ताकि वह अपने नाबालिग बेटे की देखभाल फिर से शुरू कर सके।
अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि महिला अपनी ही मां की नृशंस और निर्मम हत्या में शामिल थी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि अपराध की गंभीरता और जघन्य प्रकृति को देखते हुए, इस स्तर पर महिला की रिहाई मुकदमे के लिए अनुकूल नहीं होगी।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश

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