हिमाचल: छात्रा की रैगिंग के आरोप में तीन लड़कियों पर मामला दर्ज, प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

हिमाचल: छात्रा की रैगिंग के आरोप में तीन लड़कियों पर मामला दर्ज, प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

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  • Publish Date - January 2, 2026 / 08:21 PM IST,
    Updated On - January 2, 2026 / 08:21 PM IST

शिमला/धर्मशाला, दो जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित एक सरकारी कॉलेज की तीन छात्राओं पर रैगिंग और जानबूझकर चोट पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया जबकि एक प्रोफेसर के खिलाफ 19 वर्षीय युवती के यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि छात्रा की 26 दिसंबर को लुधियाना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी और मृतका के पिता की शिकायत के बाद बृहस्पतिवार को मामला दर्ज किया गया।

मृतका के पिता ने शिकायत में आरोप लगाया कि 18 सितंबर, 2025 को उनकी बेटी को तीन वरिष्ठ छात्राओं हर्षिता, आकृति और कोमोलिका ने पीटा था जबकि कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार ने उससे अश्लील हरकतें की थीं।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि मारपीट व उत्पीड़न के बाद छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद उनकी बेटी गंभीर मानसिक तनाव और डर के साए में जी रही थी, जिससे उसकी हालत बहुत तेजी से बिगड़ी।

उन्होंने बताया कि उनकी बेटी सदमे में थी और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था इसलिए पहले पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई जा सकी।

पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 3(5) (सामान्य इरादा) और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम 2009 की धारा तीन के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।

कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अशोक रतन ने मामला दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी आरोपों की गहन जांच की जा रही है।

उन्होंने बताया कि मेडिकल रिकॉर्ड, वीडियो सबूत और सभी संबंधित पक्षों के बयान की जांच की जा रही है।

इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वीडियो में पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने प्रोफेसर के व्यवहार का विरोध किया तो आरोपी ने उससे अभद्रता की, उसका मानसिक उत्पीड़न किया और धमकी दी।

पुलिस ने बताया कि मुख्यमंत्री संकल्प सेवा हेल्पलाइन के माध्यम से शुरू में शिकायत प्राप्त हुई थी और एक जांच दल भेजा गया था लेकिन छात्रा की तबीयत खराब होने के कारण उसका बयान दर्ज नहीं किया जा सका।

पुलिस ने बाद में पीड़िता के पिता का बयान दर्ज किया।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि छात्रा ने 2024 में कॉलेज में दाखिला लिया था।

आरोप है कि कुछ छात्राओं ने उसकी रैगिंग की और वह बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल रही थी।

जुलाई 2025 में परिणाम घोषित होने के बाद छात्रा ने कॉलेज जाना बंद कर दिया और 21 अगस्त 2025 को उसका नाम कॉलेज के रिकॉर्ड से हटा दिया गया। छात्रा, सितंबर में फिर से प्रवेश के लिए कॉलेज पहुंची, जहां उसे बताया गया कि उसे दूसरे वर्ष में तभी प्रवेश मिलेगा जब वह पुनर्मूल्यांकन में उत्तीर्ण हो जाएगी नहीं तो उसे पहले वर्ष में पुनः दाखिला लेना होगा।

इस बीच, आरोपी प्रोफेसर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया।

कुछ शिक्षकों ने प्रोफेसर का समर्थन किया है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की राज्य सचिव नैन्सी अटल ने कहा कि आरोपियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। शिमला नगर निगम के पूर्व महापौर संजय चौहान के नेतृत्व में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को यहां पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

चौहान ने कहा कि चूंकि महिला दलित समुदाय से है, इसलिए मामले की प्रासंगिक पहलुओं से जांच होनी चाहिए।

हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस संबंध में कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने मामले में पुलिस की भूमिका और जांच में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि अगर न्यायिक जांच का आदेश नहीं दिया गया तो वे मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर धरना देंगे।

भाषा जितेंद्र माधव

माधव