शिमला, 15 जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण (पीडब्ल्यूडी) मंत्री विक्रमादित्य सिंह के ‘‘बिहार और उत्तर प्रदेश से आए कुछ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के राज्य के हित में काम नहीं करने’’ संबंधी बयान के बाद, दोनों सेवाओं के संघों ने बुधवार को चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां संस्थानों में जनता का भरोसा अनजाने में कमजोर कर सकती हैं।
सिंह ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा था, ‘‘हिमाचल प्रदेश का हित सर्वोपरि है।’’ उन्होंने किसी अधिकारी का नाम लिए बिना आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश एवं बिहार से आए कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी हिमाचल प्रदेश के हित में काम नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि सड़कों और अन्य परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से आने वाले धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा था, ‘‘मैं केंद्र एवं राज्य के संबंध को समझता हूं और यह भी मानता हूं कि आईएएस एवं आईपीएस अधिकारी किसी भी राज्य काडर में काम कर सकते हैं और उनका हिमाचल प्रदेश में स्वागत है। लेकिन एक बात समझनी होगी कि राज्य का हित सबसे ऊपर है और राज्य के अधिकार की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।’’
हिमाचल प्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने मंत्री की टिप्पणी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यहां जारी एक बयान में कहा कि अधिकारियों को उनके मूल राज्य के आधार पर अलग करना अनुचित है और इससे सिविल सेवाओं के मनोबल एवं तटस्थता को अनावश्यक नुकसान पहुंचने का जोखिम है।
बयान में कहा गया है, ‘‘इस तरह के व्यापक बयान संस्थानों में जनता का भरोसा अनजाने में कमजोर कर सकते हैं और प्रशासन के कामकाज पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।’’
उसमें राज्य सरकार से आग्रह किया गया कि वह उच्चतम स्तर पर दिशानिर्देश जारी करे ताकि सार्वजनिक विमर्श अधिकारियों की व्यक्तिगत या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के बजाय नीतियों और परिणामों पर केंद्रित रहे।
राज्य आईपीएस एसोसिएशन द्वारा जारी एक अन्य बयान में कहा गया कि मंत्री की टिप्पणियां राज्य में सेवारत हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच एक कृत्रिम और अवांछनीय विभाजन पैदा करती हैं।
इस बयान में राज्य सरकार से आग्रह किया गया कि वह इस मुद्दे का गंभीरता से संज्ञान ले, विक्रमादित्य सिंह के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की तैनाती न करे तथा यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसे बयान न दोहराए जाएं और सिविल सेवाओं की गरिमा, एकता एवं तटस्थता को बरकरार रखा जाए।
भाषा
वैभव सिम्मी मनीषा
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