आईबीसीए भारत की बाघ संरक्षण पहलों की सर्वोत्तम प्रथाएं साझा करेगा: भूपेंद्र यादव

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आईबीसीए भारत की बाघ संरक्षण पहलों की सर्वोत्तम प्रथाएं साझा करेगा: भूपेंद्र यादव

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  • Publish Date - May 19, 2026 / 09:30 PM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 09:30 PM IST

(अलिंद चौहान)

नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा है कि इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) भारत की ‘बाघ परियोजना’ और वन्यजीव संरक्षण की अन्य सफल पहलों से उभरी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करेगा।

आईबीसीए शिखर सम्मेलन 2026 से पहले ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि इन प्रथाओं में नीतियों के क्रियान्वयन के लिए पैरवी, बाघों की आबादी और उनके आवासों का समय-समय पर आकलन, आवास प्रबंधन की रणनीतियां और प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी प्रोटोकॉल आदि शामिल हैं।

भूपेन्द्र यादव ने कहा, “भारत की वन्यजीव संरक्षण में सफलता यह दर्शाती है कि विज्ञान-आधारित संरक्षण, समुदाय की भागीदारी और निरंतर निगरानी से ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।”

आईबीसीए सम्मेलन 2026 का आयोजन 1-2 जून को किया जाएगा, जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विशेषज्ञ और साझेदार शामिल होंगे। यह सम्मेलन दुनिया के सात प्रमुख ”बिग कैट” प्रजातियों—बाघ, शेर, हिम तेंदुआ, तेंदुआ, जगुआर, प्यूमा और चीता— के संरक्षण पर विचार-विमर्श के लिए आयोजित होगा।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख परिणाम बाघ और इस प्रजाति के संरक्षण पर पहली बार वैश्विक घोषणा को अपनाना होगा, जिसे ‘दिल्ली घोषणा’ नाम दिया गया है।

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि यह ऐतिहासिक घोषणा आवासों के संरक्षण और पुनर्स्थापन, लैंडस्केप संरक्षण दृष्टिकोण के माध्यम से पारिस्थितिक संपर्क को मजबूत करने, सीमा-पार सहयोग को बढ़ावा देने तथा इन पशुओं के संरक्षण के सतत विकास योजनाओं में शामिल करने जैसी प्रतिबद्धताओं को शामिल करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इस घोषणा में आदिवासी समुदायों और स्थानीय लोगों की केंद्रीय भूमिका को मान्यता दी जाएगी। इसमें समान लाभ-साझेदारी, हरित आजीविका के अवसरों के सृजन और सह-अस्तित्व आधारित संरक्षण दृष्टिकोणों को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल होंगे।

भाषा रंजन पवनेश

पवनेश

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