आईआईटी-दिल्ली ने एमएससी छात्र की मौत के मामले में बाहरी जांच समिति गठित की

Ads

आईआईटी-दिल्ली ने एमएससी छात्र की मौत के मामले में बाहरी जांच समिति गठित की

  •  
  • Publish Date - August 25, 2026 / 08:46 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 08:46 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली ने एमएससी भौतिकी के 31 वर्षीय छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम छात्रों द्वारा परिसर में विरोध-प्रदर्शन किए जाने और इसके चलते प्रशासन द्वारा सोमवार को कक्षाएं स्थगित करने का आदेश दिए जाने के बाद हुआ।

समिति में उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार (जो आईआईटी-दिल्ली के पूर्व छात्र और हरियाणा खेल विश्वविद्यालय के कुलपति हैं) और एम्स, नयी दिल्ली में मन: चिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शर्मा शामिल हैं।

इसके अलावा, दो छात्र प्रतिनिधि और आईआईटी-दिल्ली के रजिस्ट्रार भी बाहरी जांच समिति का हिस्सा होंगे।

इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति संबंधित छात्रों और संकाय सदस्यों से बात करेगी, संबंधित प्रशासनिक कार्यालयों के कामकाज की पड़ताल करेगी, मौजूदा प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी और सिफारिश देगी। समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया गया है।’’

अधिकारी ने कहा कि संस्थान यह सुनिश्चित करेगा कि समिति को इस मामले की व्यापक रूप से जांच करने और छात्र सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त उपायों की पहचान करने का अधिकार दिया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, उन छात्र शिकायतों के समाधान के लिए एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का प्रस्ताव है, जिनका मौजूदा आंतरिक तंत्र के ज़रिए समाधान नहीं हो पाया है।’’

एमएससी भौतिकी के 31 वर्षीय छात्र की शनिवार को परिसर की एक इमारत की छठी मंज़िल से कथित तौर पर कूदने से मौत हो गई थी।

पुलिस ने बताया कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन मृतक की जेब से मिले मोबाइल फ़ोन की जांच की जाएगी।

इसने कहा कि प्रथम दृष्टया, गिरने से लगी चोटों के अलावा उनके शरीर पर चोट का कोई और निशान नहीं मिला।

पुलिस ने बताया कि जांच के तहत संस्थान से छात्र के काउंसलिंग रिकॉर्ड और दूसरी ज़रूरी जानकारी ली जा रही है। साथ ही, छात्र की मौत की वजह संबंधी परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है और उपलब्ध सभी जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है।

आईआईटी-दिल्ली ने एक बयान में कहा, ‘‘छात्र जुलाई 2025 में आईआईटी-दिल्ली आया था और परिसर के हॉस्टल में रह रहा था। वह पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार छात्र था। इस साल होली के त्योहार के कुछ दिन बाद, साथी छात्रों की चिंता के पश्चात उसे तुरंत संस्थान की एम्बुलेंस से आईआईटी-दिल्ली अस्पताल भेजा गया। संस्थान के मनोचिकित्सक ने उसकी जांच की और उसे मदद दी, जिसके बाद उसके परिवार ने कहा कि वे उसे किसी विशेष अस्पताल ले जाना चाहते हैं।’’

इसमें कहा गया, ‘‘इसके बाद, अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले उसने एक विशेष अस्पताल में लगभग एक महीने तक भर्ती रहकर इलाज कराया। बाद में छात्र ने दूसरे सेमेस्टर (जनवरी-मई 2026) से हटने का अनुरोध किया, जिसे संस्थान ने मंज़ूरी दे दी। जुलाई में उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की समीक्षा की गई और फिर से चिकित्सीय सलाह दी गई कि उये माता-पिता की देखरेख में ही रहना चाहिए।’’

बयान में कहा गया, ‘‘उसे जुलाई और अगस्त 2026, दोनों महीनों में संस्थान के काउंसलर/डॉक्टर से काउंसलिंग और इलाज में मदद मिली। संस्थान ने तीसरे सेमेस्टर (जुलाई-नवंबर 2026) से हटने के उसके अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया।’’

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप