नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) प्रसिद्ध फिल्मकार इम्तियाज अली ने बॉलीवुड में काम की कमी और इसके पीछे ‘साम्प्रदायिक पहलू’ होने संबंधी संगीतकार ए. आर. रहमान की टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद के बीच उनका समर्थन करते हुए कहा है कि उनके बयान को शायद गलत समझा गया है।
ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार ने हाल ही में ‘बीबीसी एशियन नेटवर्क’ को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि हिंदी फिल्म उद्योग में उनके काम की मात्रा पिछले आठ वर्षों में कम हो गई है, और उन्होंने संकेत दिया कि यह संभवतः ‘सांप्रदायिक पहलू’ से जुड़ा हो सकता है।
उन्होंने उद्योग की सत्ता संरचना में आए बदलावों की ओर भी इशारा किया और कहा कि रचनात्मक नियंत्रण कलाकारों के हाथ से निकल गया है।
उनकी टिप्पणियों ने ऑनलाइन और फिल्म उद्योग के भीतर एक बहस छेड़ दी, जिसमें आलोचकों ने उनके विचारों के आधार पर सवाल उठाए।
अली ने ‘रॉकस्टार’, ‘हाईवे’, ‘तमाशा’ और हाल ही में ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसी फिल्मों के लिए रहमान के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में उन्होंने कभी भी किसी तरह का ‘सांप्रदायिक पूर्वाग्रह’ महसूस नहीं किया है।
फिल्मकार ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया, “नहीं, मुझे नहीं लगता कि फिल्म उद्योग में कोई सांप्रदायिक पूर्वाग्रह है। मैं यहां लंबे समय से हूं, और मैंने ऐसा कभी नहीं देखा है, और ए आर रहमान फिल्म उद्योग के उन सबसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों में से एक हैं, जिनसे मैं मिला हूं।”
उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि उन्होंने वह सब कहा, जो उनके नाम से जोड़ा जा रहा है, या हो सकता है कि उनका गलत अर्थ निकाला गया है। वास्तव में, मैं जानता हूँ कि उन्होंने बिल्कुल वैसा नहीं कहा, जैसा समझा जा रहा है। साथ ही, मुझे एक भी ऐसी घटना याद नहीं है, जिसमें सांप्रदायिक पूर्वाग्रह या द्वेष का कोई संकेत हो।’
बीबीसी एशियन नेटवर्क के साथ एक साक्षात्कार में, रहमान से पूछा गया कि क्या उन्हें 1990 के दशक में अपने करियर की शुरुआत के दौरान हिंदी फिल्म उद्योग में किसी प्रकार के पक्षपात का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने जवाब दिया, ‘हो सकता है कि मुझे इन सब बातों का पता न चला हो। हो सकता है कि भगवान ने इन सब बातों को छिपाकर रखा हो। लेकिन मुझे तो कभी इन सब बातों का एहसास नहीं हुआ, लेकिन पिछले आठ वर्षों में, शायद, क्योंकि सत्ता में बदलाव हुआ है।’
उन्होंने कहा, ‘‘अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है, जो रचनात्मक नहीं हैं, और यह शायद किसी साम्प्रदायिक पहलू से भी जुड़ा हो सकता है, लेकिन मेरे सामने नहीं। यह मुझे अफवाहों के रूप में पता चलता है कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन संगीत कंपनी ने अपने पांच संगीतकारों को काम पर रख लिया। मैंने कहा, ‘ओह, यह तो बढ़िया है, मुझे आराम करने के लिये समय मिल गया है, मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिता सकता हूँ।’’
रहमान की टिप्पणियों की आलोचना करने वालों में अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत भी शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें ‘पूर्वाग्रही और घृणास्पद’ बताया।
प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि वह सांप्रदायिक पूर्वाग्रह के सुझाव से असहमत हैं। अख्तर ने कई फिल्मों में रहमान के साथ काम किया है।
इस मुद्दे पर बहस तेज होने के बाद रहमान ने रविवार को सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों को गलत समझा गया और उनका इरादा कभी भी किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
उन्होंने कहा, “भारत मेरी प्रेरणा, मेरा गुरु और मेरा घर है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी इरादों को गलत समझा जा सकता है। लेकिन मेरा उद्देश्य हमेशा संगीत के माध्यम से लोगों का उत्थान, सम्मान देना और सेवा करना रहा है। मैंने कभी किसी को दुख पहुंचाना नहीं चाहता था और मुझे उम्मीद है कि मेरी ईमानदारी महसूस की जाएगी।”
भाषा तान्या दिलीप
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