भारत-पाकिस्तान के नेताओं, पूर्व राजनयिकों ने दोनों सरकारों से वार्ता बहाल करने की अपील की

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भारत-पाकिस्तान के नेताओं, पूर्व राजनयिकों ने दोनों सरकारों से वार्ता बहाल करने की अपील की

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  • Publish Date - July 1, 2026 / 04:31 PM IST,
    Updated On - July 1, 2026 / 04:31 PM IST

श्रीनगर, एक जुलाई (भाषा) भारत और पाकिस्तान के 100 से ज़्यादा जाने-माने नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय वार्ता बहाल करने और सामान्य संबंध बहाल करने की अपील की है। इन लोगों में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती भी शामिल हैं।

एक खुले पत्र में, अब्दुल्ला, मुफ़्ती, खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के पूर्व प्रमुख ए एस दुलत, राज्यसभा सदस्य मनोज झा, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काज़ी, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक़, पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के अलावा कई सेवानिवृत्त राजनयिकों और नागरिक संस्थाओं के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं।

इसमें दोनों देशों की सरकारों से ‘‘दक्षिण एशिया में शांति, सामान्य स्थिति, बातचीत और सहयोग बहाल करने की दिशा में सार्थक और सतत कदम उठाने’’ को कहा गया है। तीस जून के इस पत्र का समन्वय ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ के अध्यक्ष ओ. पी. शाह ने किया।

इस पत्र पर भारत के 61 और पाकिस्तान के 55 नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में जोर दिया गया है कि ‘‘मतभेदों के समाधान के लिए निरंतर संपर्क और संवाद ही एकमात्र व्यवहार्य मार्ग है।’’

हस्ताक्षर करने वालों ने पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने, उच्चायुक्तों की नियुक्ति फिर से करने, सामान्य वीज़ा सेवाएं शुरू करने और सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत फिर से शुरू करने की मांग की।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर बातचीत करने की भी मांग की, जिसमें 2004 और 2007 के बीच तय हुए ढांचे पर फिर से विचार करना, साथ ही दोनों देशों की ‘‘सुरक्षा से जुड़ी जायज़ चिंताओं’’ को ध्यान में रखते हुए सेना की तैनाती कम करने और तनाव घटाने की दिशा में कदम उठाना शामिल है।

इस अपील में व्यापार के रास्ते फिर से खोलने, सामान्य व्यावसायिक संबंध बहाल करने, ‘तरजीही देश’ या उसके बराबर की भेदभाव-रहित व्यापार व्यवस्था को फिर से लागू करने एवं अटारी-वाघा सीमा को दोबारा खोलने की भी मांग की गई।

इसमें करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने, तीर्थयात्रियों के लिए शारदा पीठ को खोलने, यात्रा से जुड़ी पाबंदियों में ढील देने, छात्रों, पत्रकारों, कलाकारों और कारोबारियों के बीच ज़्यादा आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और मीडिया संस्थानों एवं डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लगी पाबंदियां हटाने की मांग की गई।

पत्र में दिल्ली-लाहौर बस सेवा, श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू करने, कारगिल-स्कार्दू रूट खोलने और व्यावसायिक उड़ानों के लिए एयरस्पेस को फिर से खोलने की भी मांग की गई।

पत्र में कहा गया है, ‘‘दक्षिण एशिया का भविष्य बंटवारे और टकराव से नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और साझा तरक्की से तय होना चाहिए।’’ इसमें यह भी कहा गया कि यह अपील ‘‘किसी राजनीतिक रुख का समर्थन’’ नहीं है, बल्कि लगभग दो अरब लोगों की भलाई और उनकी आकांक्षाओं को ‘‘टकराव, आमना-सामना और बंटवारे से ऊपर’’ रखने का आह्वान है।

पत्र में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान में दुनिया की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा रहता है और इसमें बड़ी हिस्सेदारी युवाओं की है। हस्ताक्षर करने वालों ने लिखा है कि लगातार दुश्मनी की वजह से लाखों युवा मौकों, खुशहाली और सुरक्षित भविष्य से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने दोनों देशों की सरकारों से अलगाव के बजाय जुड़ाव, दुश्मनी के बजाय बातचीत और टकराव के बजाय सहयोग का रास्ता चुनने का आग्रह किया।

भाषा आशीष वैभव

वैभव