इंफाल, 26 मई (भाषा) जापान में रहने वाले एक भारतीय अनुसंधानकर्ता ने हाल में खोजी गई विशाल आकाशगंगा संरचना का नाम मणिपुर की ‘लोकटक’ झील के नाम पर रखा है, जिसका उद्देश्य ब्रह्मांड में पूर्वोत्तर राज्य की पहचान को ‘‘अमर’’ करना है।
राष्ट्रीय खगोल वेधशाला, जापान में ‘पोस्टडॉक्टोरल’ अनुसंधानकर्ता के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने वाले डॉ. रोनाल्डो लैशराम ने कहा कि इस संरचना का अध्ययन हवाई में स्थित ‘सुबारू टेलीस्कोप’ और ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ का उपयोग करके किया गया।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से फोन पर कहा, ‘‘यह अध्ययन, जो एक व्यापक अनुसंधान कार्यक्रम के हिस्से के रूप में अक्टूबर 2024 के आसपास शुरू हुआ था, इस महीने ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित हुआ।’’
लैशराम ने कहा कि लोकटक झील के नाम पर संरचना का नाम रखने का विचार उन्हें खोज के तुरंत बाद आया था।
उन्होंने कहा, “जब मैंने इसे पहली बार देखा, तो सबसे पहले मेरे मन में अपने गृह राज्य मणिपुर के लिए कुछ करने का विचार आया। लोकटक मणिपुर का दर्पण और जीवनरेखा है। यह सिर्फ एक झील नहीं है – यह हमारे लोगों की पहचान, कहानियों और जीवन में गहराई से समाई हुई है। मैं मणिपुर और लोकटक को ब्रह्मांड की कहानी में स्थान देना चाहता था।’’
लैशराम ने खगोल विज्ञान के प्रति अपने बचपन के आकर्षण को याद करते हुए कहा कि छह साल की उम्र में अपने गांव के एक खेत में खेलते समय एक चमकदार वस्तु को देखने के बाद उन्हें रात के समय आकाश के बारे में जिज्ञासा हुई।
उन्होंने कहा, “तब से मैं नियमित रूप से रात के समय आकाश में तारे देखने लगा। वह जिज्ञासा कभी कम नहीं हुई, बल्कि हर उस सवाल के साथ और भी मजबूत होती गई जिसका जवाब मैं नहीं दे सका।’’
लैशराम और उनके सहयोगियों ने खगोल विज्ञान के शौकीनों और अनुसंधानकर्ताओं को साझा मंच पर लाने के लिए 2025 में ‘मणिपुर एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ की भी शुरुआत की थी।
भाषा नेत्रपाल पवनेश
पवनेश