भारत की उदारता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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भारत की उदारता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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  • Publish Date - April 22, 2026 / 07:35 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 07:35 PM IST

(फाइल फोटो सहित)

कलबुर्गी (कर्नाटक), 22 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि भारत आतंकवाद से एकजुट होकर लड़ना जारी रखेगा, लेकिन देश की ‘‘उदारता’’ को ‘‘कमजोरी’’ नहीं समझा जाना चाहिए।

उन्होंने ये बातें कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि नारी शक्ति का उदय शिक्षा, अनुसंधान, शासन, उद्यमिता, नवाचार, अंतरिक्ष अनुसंधान और सशस्त्र बलों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में समानता, सशक्तिकरण और नेतृत्व की दिशा में एक परिवर्तनकारी यात्रा को दर्शाता है।

सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों द्वारा “ऑपरेशन सिंदूर” पर की गयी प्रेस वार्ता का जिक्र करते हुए उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए 2025 के आतंकी हमले को याद किया, जिसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘ये (आतंकवादी) कितने क्रूर थे? पत्नी के सामने ही वे पति की हत्या कर रहे थे। लेकिन हमें आतंकवाद से लड़ना होगा। हमें अपने दुश्मनों से लड़ना होगा। हम हमेशा साथ रहना चाहते हैं और सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं। लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझना चाहिए, यह हमारी उदारता है।’’

उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक उत्कृष्टता में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देशभर के दीक्षांत समारोहों में पदक विजेताओं में महिलाओं की संख्या लगातार अधिक रहती है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक हासिल करने वालों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।

उन्होंने स्नातक छात्रों से समाज और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना सभी नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही प्राप्त की जा सकती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आप (स्नातकोत्तर छात्र) समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने की जिम्मेदारी निभाते हैं। भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकसित भारत का सपना एक साझा राष्ट्रीय मिशन है।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘विकसित भारत तभी संभव है जब हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे। जब सभी प्रयास एक साथ आएंगे, तभी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ का निर्माण होगा।”

भाषा आशीष नरेश

नरेश