न्यायपालिका व उससे जुड़ी संस्थाओं में जनता के गहरे विश्वास को बनाए रखना हमारा दायित्व: सीजेआई सूर्यकांत

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न्यायपालिका व उससे जुड़ी संस्थाओं में जनता के गहरे विश्वास को बनाए रखना हमारा दायित्व: सीजेआई सूर्यकांत

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  • Publish Date - April 25, 2026 / 03:26 PM IST,
    Updated On - April 25, 2026 / 03:26 PM IST

जयपुर, 25 अप्रैल (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा न्यायपालिका व उससे जुड़ी संस्थाओं में जनता का गहरा विश्वास है और इस विश्वास को बनाए रखना हमारा दायित्व है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूर्व न्यायाधीशों की तुलना‘बावड़ी’ से करते हुए उन्हें ज्ञान का भंडार बताया जो चुनौतीपूर्ण समय में व्यवस्था का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत यहां ‘एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज’ (राजस्थान चैप्टर) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “जिस प्रकार यहां राजस्थान में बावड़ियां बरसात के मौसम में पानी जमा करके सूखे के समय लोगों की मदद करती हैं, उसी प्रकार सेवानिवृत्त न्यायाधीश हमारे लिए एक बहुमूल्य संसाधन हैं। लोक अदालतों, मध्यस्थता या सलाहकार भूमिकाओं जैसी कठिन परिस्थितियों में, हम सही और गलत के मार्गदर्शन के लिए इन अनुभवी न्यायाधीशों की ओर देखते हैं।”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा,“न्यायपालिका व उससे जुड़ी संस्थाओं को चाहे वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण है या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण हम सबको बहुत ज्यादा जागरुक होने की आवश्यकता है।”

कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री भजनलाल के संबोधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,“…जैसा मुख्यमंत्री ने बताया कि कैसे लोग आपके एक शब्द को भी पूजनीय मानते हैं, आदेश मानते हैं। यह बताता है कि लोगों का जनता का… न्यायपालिका व उससे जुड़ी संस्थाओं में कितना गहरा विश्वास है। यह हमारा दायित्व है कि हम उस विश्वास को बनाए रखें।”

न्यायपालिका व उससे जुड़ी संस्थाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने मोहसिन नकवी के शेर की पंक्तियों ‘जिसको तूफानों से उलझने की हो आदत, ऐसी कश्ती को समंदर भी दुआ देता है’ का उल्लेख करते हुए कहा, “आप भी ऐसा कुछ कीजिए सारी जनता का विश्वास आप में न केवल अटूट रहे, वह और ज्यादा बढ़े।”

भाषा पृथ्वी प्रशांत

प्रशांत