यादवपुर विश्वविद्यालय को वित्तीय संकट के बावजूद वैश्विक ख्याति मिली: शिक्षक संगठन का बयान

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यादवपुर विश्वविद्यालय को वित्तीय संकट के बावजूद वैश्विक ख्याति मिली: शिक्षक संगठन का बयान

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  • Publish Date - April 25, 2026 / 05:27 PM IST,
    Updated On - April 25, 2026 / 05:27 PM IST

कोलकाता, 25 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल के यादवपुर विश्वविद्यालय को ‘तृणमूल सरकार के शासनकाल में अराजकता का प्रतीक’ बताने वाली संबंधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी पर विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठन ने एक दिन बाद यहां शनिवार को कहा कि ‘गंभीर वित्तीय कठिनाइयों’ के बावजूद संस्थान को वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है।

यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और अनुसंधान के साथ-साथ संस्थान ने सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संघ ने आरोप लगाया कि ‘उत्कृष्ट संस्थान’ का दर्जा प्राप्त करने के सभी मानदंडों को पूरा करने के बावजूद विश्वविद्यालय को उसकी उचित मान्यता से वंचित रखा गया।

मोदी ने शुक्रवार को यादवपुर लोकसभा क्षेत्र के बारुईपुर में एक चुनावी रैली के दौरान यादवपुर विश्वविद्यालय में लगातार हो रही अशांति का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रतिष्ठित संस्थान, जो कभी अपनी अकादमिक विरासत के लिए विश्व स्तर पर सम्मानित था, वर्तमान शासन में अराजकता का प्रतीक बन गया है।

उन्होंने कहा था, “यादवपुर विश्वविद्यालय को कभी बड़े सम्मान के साथ देखा जाता था। इसकी नींव मजबूत अकादमिक मूल्यों पर रखी गई थी लेकिन आज लोगों को धमकाया जा रहा है और विद्यार्थियों को विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

शिक्षक संघ ने मोदी की टिप्पणियों का खंडन करते हुए कहा, “यादवपुर विश्वविद्यालय की स्थापना ब्रिटिश विरोधी आंदोलन से हुई थी और यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।”

संघ के सचिव पार्थ प्रतीम रॉय द्वारा हस्ताक्षरित बयान के मुताबिक, “गंभीर वित्तीय बाधाओं के बावजूद विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों, अधिकारियों और पूर्व विद्यार्थियों के निरंतर प्रयासों के माध्यम से इसे उत्कृष्टता केंद्र के रूप में वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है।”

बयान में आगे दावा किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत विश्वविद्यालय को धनराशि जारी नहीं की गई जबकि राज्य सरकार भी इस स्थिति को लेकर जागरूक नहीं है और धनराशि की कमी के मुद्दे का समाधान नहीं कर रही है।

संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भंग करने के कथित प्रयासों पर भी चिंता व्यक्त की।

संघ ने कहा कि इससे सार्वजनिक संस्थानों को मिलने वाली केंद्रीय धनराशि रुक ​​जाएगी।

भाषा जितेंद्र रंजन

रंजन