(तस्वीरों के साथ)
चेन्नई, दो जनवरी (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक ऐसी पहल की शुरुआत की, जिसका मकसद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास को विदेश में परिसर, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग के साथ दुनिया के पहले बहुराष्ट्रीय आईआईटी के रूप में स्थापित करना है।
संस्थान के विश्व स्तरीय संकाय, उन्नत बुनियादी ढांचे और मजबूत उद्योग संबंधों पर आधारित इस पहल को ‘आईआईटीएम ग्लोबल’ नाम दिया गया है। इसका मकसद सामाजिक प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
इस पहल के जरिये आईआईटी मद्रास का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप सहभागिता और शैक्षणिक सहयोग को सक्षम बनाकर अपनी वैश्विक उपस्थिति का विस्तार करना भी है।
भारत के दूसरे देशों की मदद करने के विषय पर जयशंकर ने कहा, “तंजानिया में आईआईटी मद्रास का परिसर स्थापित करना एक ऐसा उपाय है, जिसके जरिये भारतीय विदेश नीति ने यहां की एक संस्था की क्षमताओं का लाभ उठाकर व्यापक प्रभाव डाला है।”
‘आईआईटीएम ग्लोबल’ की शुरुआत के तहत संस्थान ने प्रमुख वैश्विक क्षेत्रों में अग्रणी बहुराष्ट्रीय संस्थानों और भागीदारों के साथ कई उच्च-प्रभाव वाले समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इनमें अमेरिका में तीन, ब्रिटेन में एक, जर्मनी में तीन, दुबई में तीन, सिंगापुर और मलेशिया सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तीन और इंडिया-फॉर-ग्लोबल पहल के तहत छह समझौता ज्ञापन शामिल हैं।
इन साझेदारियों का उद्देश्य संयुक्त अनुसंधान, उद्योगों एवं स्टार्टअप के बीच सहयोग, वैश्विक प्रतिभा तथा ज्ञान का आदान-प्रदान और तकनीकी नवाचार को वास्तविक दुनिया में अनुप्रयोग में लाना है।
आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामाकोटी के मुताबिक, ‘आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ संस्थान की एक वैश्विक पहल है, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि यह पहल चार-सूत्रीय दृष्टिकोण पर आधारित है।
कामाकोटी ने कहा, “पहला दृष्टिकोण, अपनी प्रौद्योगिकियों को विदेश में ले जाना और विभिन्न देशों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अवसरों का पता लगाना। दूसरा, हम इन देशों की परियोजनाओं को संयुक्त विकास समझौतों के तहत लाने की योजना बना रहे हैं, जिससे हमारे संकाय सदस्यों को वैश्विक चुनौतियों पर काम करने और उनके समाधान प्रदान करने में मदद मिलेगी।”
उन्होंने कहा, “तीसरा, हमारा लक्ष्य अपने स्टार्टअप को इन देशों में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों से अवगत कराना है। चौथा, हमारा लक्ष्य अपने स्टार्टअप में विदेशी निवेश आकर्षित करना है।”
कामाकोटी ने कहा कि ये चार दृष्टिकोण आईआईटीएम ग्लोबल के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा, “शुरुआत में हम अमेरिका, दुबई, मलेशिया और जर्मनी सहित पांच जगहों पर अपनी उपस्थिति कायम कर रहे हैं। सफलता मिलने पर इस पहल का विस्तार कई अन्य देशों में किया जाएगा।”
भाषा पारुल नरेश
नरेश