झारखंड: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम जमानत पर जेल से रिहा

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झारखंड: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम जमानत पर जेल से रिहा

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 06:09 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 06:09 PM IST

रांची, 14 मई (भाषा) झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम बृहस्पतिवार को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से रिहा हो गए।

उच्चतम न्यायालय ने आलम को कथित निविदा घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में जमानत दे दी।

ईडी मामले की जांच कर रही है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने कांग्रेस नेता के सहयोगी से जुड़े परिसरों से लगभग 32 करोड़ रुपये नकद जब्त किए थे, जिसके कुछ दिनों बाद 15 मई, 2024 को आलम को गिरफ्तार किया गया था।

आलम ने इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता और जारी जांच का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

आलम ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया और शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें जमानत दे दी।

आलम ने रिहाई के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से कहा, “दो साल बाद जमानत पर रिहा हुआ हूं। मुझे खुशी है कि मेरे इलाके के लोगों को उनके लिए किए गए मेरे काम याद हैं। उनमें से कई लोग मुझसे जेल में मिले। इस दौरान मुझे यह भी पता चला कि वास्तव में कौन मेरा साथ देता है।”

आलम ने कहा कि वह हमेशा से कानून का पालन करने वाले नागरिक रहे हैं और नोटिस मिलने के बाद ही ईडी के सामने पेश हुए थे।

पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, “संसदीय चुनावों के दौरान मैंने लोहरदगा में प्रचार किया और फिर साहिबगंज चला गया। मुझे नोटिस के बारे में पता चला और एक कानून का पालन करने वाले व्यक्ति के रूप में संघीय एजेंसी के सामने पेश होने के लिए मैंने 450 किलोमीटर की यात्रा की।”

उन्होंने पाकुड़ और झारखंड के लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके कठिन समय में उनका साथ दिया।

कांग्रेस की झारखंड इकाई के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पत्रकारों से कहा, “यह अत्यंत खुशी का क्षण है। दो साल बाद हमारे लोकप्रिय नेता आलमगीर साहब घर लौट आए हैं। कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल साफ दिख रहा है। हर कोई पटाखे फोड़ रहा है और जश्न मना रहा है।”

कमलेश, आलम के आवास पर मौजूद थे।

उन्होंने कहा, “हम उनकी रिहाई के संबंध में अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। उन्हें न्याय मिल गया है। भले ही इसमें देरी हुई हो, लेकिन अंततः न्याय मिल गया है।”

भाषा जितेंद्र माधव

माधव