Jodhpur Census Duty Controversy : मौत के बाद भी लगी ड्यूटी! नगर निगम की इस बड़ी लापरवाही ने पूरे प्रदेश में मचाया हड़कंप, लिस्ट देखकर परिजन हैरान

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Jodhpur में जनगणना ड्यूटी के लिए जारी सूची में मृत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं। Jodhpur Municipal Corporation की इस चूक ने शहर में चर्चा तेज कर दी है।

  • Reported By: Ranjan Dave

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  • Publish Date - April 3, 2026 / 09:01 PM IST,
    Updated On - April 3, 2026 / 09:03 PM IST

Jodhpur Census Duty Controversy / Image source : IBC24

HIGHLIGHTS
  • 2084 कर्मचारियों की सूची में मृत और रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम शामिल मिले।
  • मृतक कर्मचारियों के नाम पर भी जनगणना ड्यूटी लगाने से विवाद बढ़ा।
  • प्रभावित परिवारों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

जोधपुर: Jodhpur Census Duty Controversy जोधपुर से नगर निगम की एक बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है। निगम ने जनगणना (Census) के लिए 2084 कर्मचारियों की एक लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में उन लोगों के नाम भी डाल दिए गए हैं जो या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर जिनकी मौत हो चुकी है। इस खबर ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है और सरकारी कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।।

10 मई 2024 में हो गया निधन

इस मामले में सबसे गंभीर लापरवाही जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी के पूर्व यूडीसी अब्दुल वाहिद के केस में देखने को मिली है। जिनका निधन 10 मई 2024 को हुआ था और स्वयं नगर निगम ने ही 15 मई 2024 को उनका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया था, फिर भी उनका नाम इस सूची में शामिल है।

निधन के बाद जनगणना में लगाई ड्यूटी

इसी तरह रामापीर कॉलोनी निवासी दीपक अवस्थी, जिनका निधन 13 फरवरी 2026 को हुआ था, उन्हें भी जनगणना ड्यूटी का हिस्सा बना दिया गया। इसके अलावा, विश्वविद्यालय की पेंशनर्स कमेटी के संयोजक अशोक व्यास जो अगस्त 2024 में रिटायर हुए सहित वीरम राम और मुनाराम जैसे कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम भी इस लिस्ट में दर्ज हैं। प्रभावित परिवारों और पेंशनर्स ने इस कृत्य को प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया है।

कड़ी कार्रवाई की मांग

इस पूरी घटना से पता चलता है कि नगर निगम का रिकॉर्ड बिल्कुल भी अपडेट नहीं है। जिन लोगों की मौत हो चुकी है या जो नौकरी छोड़ चुके हैं, उनके नाम अभी भी फाइलों में चल रहे हैं। अब लोग मांग कर रहे हैं कि जिन अधिकारियों ने यह गलत लिस्ट बनाई है, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आगे से ऐसी शर्मनाक गलती न हो।

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विवाद किस वजह से शुरू हुआ?

जनगणना ड्यूटी सूची में मृत और रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम पाए गए।

कितने कर्मचारियों की सूची जारी हुई थी?

कुल 2084 कर्मचारियों की सूची जारी की गई थी।

लोग क्या मांग कर रहे हैं?

गलत सूची तैयार करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है।